दोहा: पास्कल लेमी की थेसिस अ©र आंकडों पर अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्र्ाियों के एक समूह के निष्कर्षों के जरिये सवाल उठाए गए

 पेरिस, 18 जून, पीआरन्यूजवायर- एशियानेट ।
 – कुछ देशों ने जहां दोहा द©र की बैठक शुरू करने के लिए ‘‘नई पहल’’ पर जोर दिया, वहीं मोमाग्री के प्रमुख अर्थशास्त्र्ाी द्वारा 4 अ©र 5 जून को सोरबन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय वर्कशाप के अंत में पास्कल लेमी द्वारा पेश किए गए थिसिस अ©र आंकडों पर विवाद खडा हो गया ।
 यूनिवर्सिटी प्रोफेसर अ©र मोमाग्री में मुख्य अर्थशास्त्र्ाी बरट्रांड मुनीर ने इस वर्कशाप के अंत में कहा: ‘‘कृषि संबंधी वस्तुओं की कीमतों में अचानक आई तेजी, अनुमानों का असर तथा कृषि बाजारों को समझ्ाने में हुई प्रगति जैसे मुद्ददे को लेकर कृषि बाजारों में डब्ल्यूटीओ की उदारीकरण नीति पर सवाल खडे होते हैं ।’’
: लोगो: एचटीटीपी: डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डाट न्यूजकाम डाट काम, सीजीआई-बीआईएन, पीआरएनएच, 20081013, 324331:

 इस प्रकार आईएमएफ, एफएओ, वल्र्ड बैंक, ओईसीडी, अमेरिकी विश्वविद्यालयों, थिंक टैंक तथा विभिन्न सरकारी विभागों से आए तीस अर्थशास्त्र्ाियों के बीच दो मुख्य बिंदुओं पर आम सहमति बनी:
 – अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा स्थिर कृषिगत उत्पादों की आसमान छूती कीमतों जैसे मुद्ददे को बडी चालाकी से नजरअंदाज कर दिया गया अ©र इस वजह से खाद्य असुरक्षा की स्थिति बदतर बनी है,
 – अंतरराष्ट्रीय फैसलों को निर्देशित करने वाले म©जूदा आर्थिक माडल इस सच्चाई को प्रासंगिक बनाने में असक्षम रहे हैं ।
   यूनिवर्सिटी आफ मास्ट्रिश्ट के प्रोफेसर श्यामा रमानी के मुताबिक, लिहाजा नए अंतरराष्ट्रीय माडल बनाने का महत्व बढ गया है । इस माडल में म©जूदा कृषि संबंधी इन मुद्ददों को निश्चित रूप से विश्वास के साथ शामिल किया जाना चाहिए: कीमतों में अचानक आई उछाल, बाजार का वित्त्ीयकरण तथा खाद्य सुरक्षा पर उनके परिणाम । मोमाग्री माडल वास्तविकता में सुधार लाने के लिए इन मांगों को पूरा करता है । यही वजह है कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर तथा बिल गेट्स फाउंडेशन के अर्थशास्त्र्ाी पीटर टिमर ने इसे ‘‘अपनी तरह का पहला माडल करार दिया है जिसकी हम अनदेखी नहीं कर सकते’’ जब कृषि बाजारों में उदारीकरण नीति के प्रभाव का आकलन करेंगे ।

        ऐसी स्थिति में अगर दोहा में कोई समझ्ा©ता कर लिया जाता है तो पास्कल लेमी कैसे 150 अरब डालर के लाभ: या प्रति व्यक्ति, प्रतिदिन 7 सेंट: के अपने आंकडे को मनमाने तरीके से तर्कसंगत बना सकेंगे ? मसलन वह म©जूदा माडल की वकालत कर रहे हैं जिसमें जोखिम, कीमतों की तेजी या वित्त्ीयकरण बाजारों के प्रभाव पर विचार नहीं किया गया है जबकि ये कृषि अर्थव्यवस्था विश्लेषण के लिए आवश्यक हैं ।
      हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि इन समझ्ा©तों के पीछे जो सबसे बडा खतरा है वह तकरीबन एक अरब ऐसे लोगों के जीवनयापन से जुडा हुआ है जो भूख से पीडित हैं । इसके साथ विश्व की आबादी का 40 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा कृषि पर निर्भर करता है अ©र इन समझ्ा©तों से उनकी जीविका भी खतरे में पड सकती है । जान्स हापकिन्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एडी करनी कहते हैं कि इन समझ्ा©तों को वापस करना अत्यावश्यक है जिसमें कृषि बाजार के समक्ष आने वाले जोखिमों को बडे पैमाने पर निर्णायक रूप में शामिल किया गया है ।
     इस संदर्भ में मोमाग्री माडल द्वारा नवीनतम सिमुलेशन इस भरोसे को डिगा दिया है कि दोहा राउंड के निष्कर्ष सभी किसानों खासकर विकासशील देशों के किसानों को लाभ पहुंचाएगा ।

         इससे भी बदतर यह कि उन्होंने दिखाया है कि अंतरराष्ट्रीय कृषि कारोबार के पूर्ण रूप से अनियंत्र्ाित उदारीकरण की वजह से पनप सकता है:
      – निर्धनतम देशों के किसानों के राजस्व में एक महत्वपूर्ण कमी आएगी: कुछ मामलों में यह कमी आधे से ज्यादा भी हो सकती है अ©र इस प्रकार इन देशों के कई किसान बर्बादी के कगार पर पहुंच सकते हैं:
– रेखांकित कमी से भी कम हो सकता है लेकिन भारत जैसे उभरते आयातक देशों के लिए बेहद गंभीर कमी आ सकती है ।
– विकसित देशों के किसानों के राजस्व में महत्वपूर्ण क्षरण हो सकता है । परिणामस्वरूप उत्पादन के तथ्यों को आधुनिक बनाए जाने के लिए प्रोत्साहन करने के बजाय यह वैश्विक खाद्य सुरक्षा को खतरे में डाल देगा अ©र साथ ही कई देशों का विकास भी रुक जाएगा ।
   सिर्फ ब्राजील जैसे उभरते निर्यातक देश नुकसान से बच पाने में सक्षम होंगे लेकिन यह उत्पादन में सामान्य कमी के लिए मुआवजा दिए बगैर होगा ।
    मोमाग्री के बारे में
मोमाग्री एक पेरिस स्थित थिंक टैंक है जो कृषि के लिए नए दृष्टिकोण को बढावा देता है । फ्रेंच ग्रुप लिमाग्रेन के चेयरमैन पियरे पेगेसी द्वारा स्थापित अ©र उनकी अध्यक्षता वाली इस संस्था में कृषि उद्यमों के प्रतिनिधि अ©र स्वास्थ्य सेवा, आर्थिक विकास, रणनीति तथा रक्षा क्षेत्र्ाों के अधिकारी शामिल हैं ।

         इस संस्था का लक्ष्य मुक्त व्यापार सिद्धांतों पर आधारित किसी अंतरराष्ट्रीय कृषि तथा खाद्य नियामक के लिए नए क्रांतिकारी उपकरणों: जिसमें आर्थिक माडल एवं संकेतक भी शामिल हैं: के जरिये कृषि बाजारों के नियंत्र्ाण में सहयोग करना है ।
एचटीटीपी: डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डाट मोमाग्री डाट ओआरजी
स्रोत: मोमाग्री
पीआरन्यूजवायर- एशियानेट: रंजन