स्विस की एक टीम ने मस्तिष्क की गतिविधियों में गडबडी से पीडित मरीजों के इलाज के लिए ट्रांसक्रेनियल एमआर-गाइडेड केंद्रित अल्ट्रासाउंड का इस्तेमाल किया

टाइरेट कारमेल, 14 जुलाई, पीआरन्यूजवायर- एशियानेट ।
    
  – दस मरीजों पर किया गया संभाविता अध्ययन नान-इनवेसिव डीप ब्रेन एब्लेशन की सुरक्षा तथा क्षमता प्रदर्शित करता है ।
       इनसाइटेक लिमिटेड ने आज घोषणा की कि यूनिवर्सिटी चिल्ड्रेन’स हास्पिटल ज्यूरिख की एक टीम ने न्यूरोपैथिक दर्द के उपचार के लिए नान-इनवेसिव ट्रांसक्रेनियल एमआर-गाइडेड केंद्रित अल्ट्रासाउंड सर्जरी: एमआरजीएफयूएस: के इस्तेमाल परीक्षण का संभाविता अध्ययन पूरा कर लिया है । दस मरीजों का क्रोनिक न्यूरोपैथिक दर्द का ट्रांसक्रेनियल एमआरजीएफयूएस की मदद से नान-इनवेसिव डीप ब्रेन एब्लेशन सर्जरी: सेंट्रल लैटरल थेलामोटोमी: के जरिये सफलतापूर्वक उपचार कराया गया अ©र इसमें दर्द के स्तर में कमी देखी गई तथा तीन महीने तक इसके जरिये उपचार कराने से किसी तरह के प्रतिकूल असर के बगैर दर्द मेडिकेशन में कमी आई ।

        विश्व का यह पहला ऐसा अध्ययन है जिसमें नान-इनवेसिव ट्रांसक्रेनियल केंद्रित अल्ट्रासाउंड का परीक्षण मस्तिष्क सक्रियता में गडबडी के इलाज के त©र पर किया गया ।
      यूनिवर्सिटी आफ ज्यूरिख में न्यूरोसर्जन डेनियल जीनमोनोड ने कहा, ‘‘यह अध्ययन दर्शाता है कि हम मस्तिष्क की खोपडी को खोले बगैर या किसी उपकरण से इसमें छेद किए बगैर मस्तिष्क का गहराई तक सफलतापूर्वक आपरेशन कर सकते हैं जो अब से महज कुछ वर्ष पहले तक अकल्पनीय था । मस्तिष्क में किसी तरह का भ©तिक रूप से छेद किए बगैर हम मरीजों के एक वृहद समूह पर कोई दुष्प्रभाव डाले बगैर इनवेसिव डीप ब्रेन एब्लेशन के थेराप्यूटिक प्रभाव की डुप्लीकेट की उम्मीद करते हैं ।’’
      न्यूरोसर्जन वर्तमान में न्यूरोपैथिक पेन या पर्किंसन रोग जैसे फंक्शनल न्यूरोलाजिकल गडबडी से पीडित मरीजों का इलाज क्रेनियम के जरिये एक छोटी सी जांच के आधार पर करते हैं अ©र मस्तिष्क में क्षतिग्रस्त उ?त्त्क को दुरुस्त करते हैं ।
      डा. जीनमोनोड ने बताया, ‘‘ज्यादातर परंपरागत इनवेसिव उपचार पद्धति से दर्द अ©र अन्य तकलीफों को दूर किया जाता है । हालांकि इस उपचार पद्धति से संक्रमण, रक्तस्राव तथा आसपास के मस्तिष्क उ?त्त्क को नुकसान जैसी शिकायतें होने लगती हैं ।’’

          उन्होंने कहा, ‘‘साथ ही इस पद्धति के जरिये मरीजों के उन्हीं क्षतिग्रस्त उ?त्त्कों का इलाज इनवेसिव प्रक्रिया के तहत हो पाता है जिन्हें जांच के द©रान स्पष्ट रूप से लक्षित किया जाता है ।’’
      यूनिवर्सिटी चिल्ड्रेन’स हास्पिटल ज्यूरिख में मैग्नेटिक रिजोनेंस सेंटर के निदेशक अन्स्र्ट मार्टिन, एम.डी. ने कहा, ‘‘अब हमारे पास शुरुआती स्तर पर ही ऐसा साक्ष्य मिल गया है जो सलाह देता है कि ट्रांसक्रेनियल एमआरजीएफयूएस गहरे तक मस्तिष्क के अंदर प्रभावी अ©र सुरक्षित तरीके से उ?त्त्कों को नान-इनवेसिव एब्लेट करता है । इन मरीजों की जब हमें आगे मानिटरिंग की जरूरत पडी तो आज की तारीख के मुताबिक निकले परिणामों से हम बेहद उत्साहित हुए अ©र अपने शोध को जारी रखने की उम्मीद करने लगे । नान-इनवेसिव उपचार पद्धति संक्रमण अ©र रक्तस्राव के जोखिम को कम करती है । इससे उन मरीजों की दुर्लभ जरूरत भी पूरी हो जाएगी जो वर्तमान में म©जूद उपचार विकल्पों से दूर भाग चुके हैं या इससे जुडे जोखिमों के कारण इनवेसिव ब्रेन सर्जरी कराने से कतराते हैं ।’’
     अध्ययन में शामिल एक मरीज की स्पाइनल ट्यूमर के कारण कोशिका क्षतिग्रस्त हो गई थी जिससे उसे असह्य दर्द अ©र दाहिने बाजू की नसों में गंभीर खिंचाव आ गया था ।

          उसे यह दर्द वर्षों से था अ©र बताया जाता है कि अपनी खराब स्थिति के कारण वह मरीज अवसादग्रस्त होते हुए आत्महत्या का मन बना चुका था । उसके मस्तिष्क का इलाज जैसे ही ट्रांसक्रेनियल एमआरजीएफयूएस पद्धति से कराया गया उसने अपने दर्द के गायब हो जाने की रिपोर्ट दी । कुछ समय बाद ही वह सामान्य कार्य करने में सक्षम हो गया जो न्यूरोपैथिक दर्द के कारण उससे पहले नहीं हो पाता था । इन कार्यों में बागवानी तथा अपने परिवार के साथ देश के बाहर घूमना शामिल था ।
     स्विस शोध टीम मस्तिष्क की क्रियाशीलता की गडबडी पर एक व्यापक अध्ययन की योजना बना रही है अ©र यह पर्किंसन रोग तथा ट्रेमर जैसी मूवमेंट की गडबडियों पर अपने क्लिनिकल शोध का विस्तार कर रही है तथा इस वर्ष के अंत तक अन्य फंक्शनल न्यूरोलाजिकल डिसआर्डर में भी विस्तार करने की योजना बना रही है । उत्त्री अमेरिका के अतिरिक्त क्षेत्र्ाों में भी ट्रांसक्रेनियल एमआरजीएफयूएस की मदद से फंक्शनल ब्रेन डिसआर्डर पर आधारित क्लिनिकल शोध कार्यक्रम शुरू किए जाने की उम्मीद है ।    
एक्सएब्लेट:आरः 4000 के बारे में       
   एक्सएब्लेट पहली ऐसी प्रणाली है जिसमें एमआर गाइडेड केंद्रित अल्ट्रासाउंड तकनीकी का इस्तेमाल किया जाता है ।

         इस प्रणाली में शारीरिक सुदृढता के आकलन तथा निश्चित समय में उपचार एवं उपचार परिणामों की योजना के लिए एमआरआई अ©र ब्रेन टिश्यू नान-इनवेसिवली को लक्षित करने के लिए उच्च तीव्रता केंद्रित अल्ट्रासाउंड को शामिल किया जाता है । एमआर थर्मोमेट्री फिजिशियनों को यह सुनिश्चित करने के लिए निश्चित समय में उपचार पर नियंत्र्ाण पाने तथा इसे समायोजित करने की क्षमता प्रदान करती है कि लक्षित क्षेत्र्ा का पूर्ण इलाज हो चुका है अ©र आसपास के उ?त्त्कों को नहीं छेडा गया है । एक्सएब्लेट 4000 ब्रेन ट्यूमर, फंक्शनल न्यूरोसर्जरी, स्ट्रोक तथा लक्षित ड्रग डिलेवरी जैसे विविधतापूर्ण ट्रांसक्रेनियल लक्षणों का एक प्लेटफार्म है ।
    इसी तकनीकी पर आधारित एक्सएब्लेट: आर: 2000 को वर्ष 2004 में यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने सिंपटोमेटिक यूटेरिन फाइब्रोइड्स के उपचार के लिए अनुमोदित किया था । वैश्विक स्तर पर इस पद्धति से आज की तारीख तक 5,000 महिलाओं का इलाज कराया जा चुका है । एक्सएब्लेट 2000 को हड्डियों के मेटास्टेसेस के दर्द निवारण के लिए जून 2007 में यूरोपियन सीई मार्क सर्टिफिकेशन मिल चुका है ।
   इनसाइटेक के बारे में
 इनसाइटेक लिमिटेड एक निजी कंपनी है जिस पर अल्बिट इमेजिंग, जनरल इलेक्ट्रिक, मेडिटेक एडवायजर्स, एलएलसी तथा कर्मचारियों का स्वामित्व है ।

        इसकी स्थापना एमआर गाइडेड फोकस्ड अल्ट्रासाउंड तकनीकी की सफलता को विकसित करने अ©र इसे आगामी पीढी के आपरेटिंग रूम में हस्तांतरित करने के लिए वर्ष 1999 में की गई थी । इजराइल के हाइफा के पास स्थित मुख्यालय के साथ कंपनी में 160 से ज्यादा  कर्मचारी कार्यरत हैं अ©र इसने शोध, विकास तथा क्लिनिकल जांच में 15 करोड डालर से ज्यादा का निवेश किया है । इसका अमेरिकी मुख्यालय टेक्सास के डलास में म©जूद है । अधिक जानकारी के लिए कृपया देखें: एचटीटीपी: डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डाट इनसाइटेक डाट काम
      अधिक जानकारी के लिए इसके लेख पढें: एचटीटीपी: डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डाट एनजेडजेड डाट सीएच, नेक्रिश्टेन, वाइजेनशाफ्ट, ओपेरिएरेन अंडरस्कोर ओएचएनई अंडरस्कोर स्कालपेल अंडरस्कोर 1.2780898 डाट एचटीएमएल: जो न्यू जर्चर जेटंग में देखा जा सकता है ।: इस यूआरएल की लंबाई को देखते हुए इस हाइपरलिंक को अपने इंटरनेट ब्राउजर के यूआरएल एड्रेस फील्ड में कापी एंड पेस्ट कर लेना ही लाजिमी है । अगर इस बीच किसी तरह का स्पेस है तो उसे हटा लें:
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स्रोत: इनसाइटेक लिमिटेड