टायोट्रोपियम से इलाज कराने वाले गोल्ड स्टेज टू की सर्वाधिक संख्या के मरीजों से एकत्र्ाित आंकडे सीओपीडी के शुरुआती उपचार के लाभ दर्शाते हैं

इंगेलहेम, 28 अगस्त, पीआरन्यूजवायर- एशियानेट ।
 – नया अपलिफ्ट: आर: एनलिसिस दर्शाता है कि टायोट्रोपियम महत्वपूर्ण रूप से फेफडे की क्रिया में सुधार लाता है अ©र सीओपीडी से पीडित शुरुआती चरण के मरीजों की जीवन गुणवत्त में सुधार होता है ।
     – अमेरिकी मीडिया के लिए नहीं
        लैंसेट में आज प्रकाशित लैंडमार्क अपलिफ्ट: आर: परीक्षण का एक नया विश्लेषण बताता है कि क्रोनिक आब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीजन:सीओपीडीः से पीडित अ©र आंशिक रोग के कारण कंपकपी: गोल्ड – ग्लोबल इनिसिएटिव फार क्रोनिक आब्सट्रक्टिव लंग डिजीज- दूसरा चरण: के लक्षण वाले मरीजों पर आजमाया गया टायोट्रोपियम: स्पायरीवा:आरः हैंडिहेलर:आरः 18 माइक्रो ग्राम: का नुस्खा चार वर्षों तक के लिए फेफडों की गतिविधि में आश्चर्यजनक अ©र स्थायी सुधार के रूप में देखा गया है ।

          :1ः पहले से ही अलग किए गए इस उपसमूह के विश्लेषण में 2,739 मरीजों को शामिल किया गया – जो एक यादृच्छ तथा प्लेसबो नियंत्र्ाित अध्ययन के लिए सीओपीडी से पीडित शुरुआती चरण के मरीजों का लंबे समय तक एंटीकोलिनर्जिक के जरिये उपचार कराने वाला सबसे बडा समूह था ।
       नया अपलिफ्ट:आर: विश्लेषण बताता है कि गोल्ड स्टेज दो के द©रान सीओपीडी से पीडित मरीजों में टायोट्रोपियम सीओपीडी की प्रगति धीमी हो सकती है क्योंकि इसे फेफडे की गतिविधि में कमी की दर के त©र पर आंका जाता है । टायोट्रोपियम कंट्रोल:49 एमएल प्रति वर्ष की तुलना में 43 एमएल प्रति वर्ष, पी 0.024 के बराबर: की तुलना में चार वर्षों के द©रान पोस्टब्रोंकोडिलेटर एफईवी1 में घटने की दर कम करती है । प्रीब्रोंकोडिलेटर एफईवी1 में कमी की दर इन समूहों के बीच समान देखी गई ।
     ब्रोंकोडिलेटर एफईवी1 से पहले अ©र बाद की स्थिति में सुधार संपूर्ण परीक्षण: क्रमशः 101-119 एमएल, पी 0.0001 से कमः पर नियंत्र्ाण की तुलना में बरकरार रहा । टायोट्रोपियम का सेवन करने वाले गोल्ड स्टेज दो के मरीजों में पीडा सहने का खतरा 18 प्रतिशत कम देखा गया अ©र उनमें नियंत्र्ाण की तुलना में 20 प्रतिशत कम पीडा देखी गई: पी 0.0001 से कम: ।

        संपूर्ण अध्ययन के द©रान: पी 0.006 से कम या बराबर: टायोट्रोपियम से उपचार कराने वाले मरीजों में नियंत्र्ािण मरीजों की अपेक्षा स्वास्थ्य संबंधी जीवन की गुणवत्त बेहतर रही, जैसाकि सेंट जाज्र्स रेस्पायरेटरी क्वेचेनेयर: एसजीआरक्यू: का आकलन था । इस द©रान कंट्रोल की तुलना में टायोट्रोपियम के जरिये मृत्यु दर में भी कमी आने का भी चलन देखा गया ।:1ः
        अपलिफ्ट:आरः का नेतृत्व करने वाले प्रोफेसर, मेडिसीन के प्रोफेसर अ©र बेल्जियम स्थित कैथोलिकी यूनिवर्सिटी ल्यूवेन में रेस्पायरेटरी डिवीजन के प्रमुख प्रोफेसर मार्क डीक्रेमर ने कहा, ‘‘क्लिनिकल प्रैक्टिस के लिए ये नतीजे बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यह पहला अ©र दीर्घकालीन अध्ययन है जो दिखाता है कि लंबे समय तक एंटीकोलिनर्जिक से किया गया उपचार मरीजों को सीओपीडी के शुरुआती चरण में ही उल्लेखनीय फायदा पहुंचाता है । अपलिफ्ट:आर: से जाहिर हो गया है कि इस रोग के शुरुआती चरण में फेफडे की क्रियाशीलता में आश्चर्यजनक कमी आ जाती है अ©र इसे दर्द बढाने वाले रोग की प्रगति के त©र पर जाना जाता है । लिहाजा यह नया विश्लेषण सुनिश्चित करता है कि हमें टायोट्रोपियम जैसी दवा से इसके शुरुआती चरण में ही उपचार करा लेना चाहिए ।

       इससे फेफडे की क्रियाशीलता अ©र जीवन की गुणवत्त में सुधार किया जा सकता है अ©र दर्द में कमी लाई जा सकती है ।’’
       सीओपीडी का सामाजिक अ©र आर्थिक बोझ्ा निरंतर बढता ही जा रहा है जिसमें मरीज रोग के खतरनाक स्थिति में पहुंचने के साथ ही वे कम से कम आत्मनिर्भर होते जाते हैं ।:2ः गोल्ड स्टेज दो एक विशेष अध्ययन है जिसमें मरीज महसूस करने लगते हैं कि उनके फेफडे की क्रियाशीलता असामान्य है अ©र सांस में रुकावट तथा थकान का अनुभव करने लग जाते हैं । जैसे-जैसे सीओपीडी बढता जाता है, फेफडे की क्रियाशीलता निरंतर कम पडती जाती है अ©र शारीरिक गतिविधि गंभीर रूप से सीमित होने लगती है, मरीजों तथा उनकी देखभाल करने वालों की क्षमता पूरे जीवनकाल तक बाधित होने लगती है, रोजाना के कार्यों में रुकावटें आने लगती हैं अ©र पारिवारिक दिनचर्या में भागीदारी भी प्रभावित होने लगती है ।:2ः इस वजह से लोग भय, बेचैनी, कुंठा, विरक्ति अ©र हीनभावना महसूस करने लगते हैं । :2ः,:3ः इसलिए यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण हो जाता है कि मरीजों का उपचार अ©र रोग का निदान जितनी जल्दी हो सके करा लिया जाए अ©र साथ ही धूम्रपान की आदत भी छोडी जाए ।

         नार्वे में फैमिली मेडिसीन के विशेषज्ञ अ©र इंटरनेशनल प्राइमरी केयर रेस्पायरेटरी ग्रुप के निदेशक डा. एंडर्स ओस्ट्रेम ने कहा, ‘‘ गोल्ड स्टेज  दो के मरीजों पर किए गए अपलिफ्ट:आरः विश्लेषण के परिणाम अत्यधिक मर्मस्पर्शी हैं । इनमें स्पष्ट रूप से बताया गया है कि मरीज यदि शुरुआती चरण में ही अपने प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल चिकित्सकों की देखरेख में उपचार कराना शुरू कर देते हैं तो वे अपने रोग के क्लिनिकल कोर्स का असर देखने में सक्षम हो सकते हैं अ©र अपने जीवन की गुणवत्त में सुधार ला सकते हैं ।’’
      :‘ः एफईवी1 – एक सेकंड में मापा गया फोस्र्ड एक्सपारेटरी वोल्यूम । पोस्टब्रोंकोडिलेटर एफईवी1 को अध्ययन के द©रान दी जाने वाली दवाओं – टायोट्रोपियम या प्लेसबो के बाद अ©र अल्पकालीन क्रियाशील ब्रोंकोडिलेटर से अतिरिक्त नियंत्र्ाण के बाद मापा गया । प्रीब्रोंकोडिलेटर एफईवी1 का आकलन स्टडी ड्रग के सेवन से पहले किया गया ।
ः‘‘ः टायोट्रोपियम समूह अ©र कंट्रोल समूह दोनों के सभी मरीजों को उनके सामान्य प्रेस्क्रायब्ड रेस्पायरेटरी मेडिकेशन जारी रखने की अनुमति दी गई जिसमें एंटीकोलिनर्जिक सूंघने को छोडकर संपूर्ण परीक्षण के द©रान खुराक एडजस्मेंट की अनुमति भी शामिल थी ।
 
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ई: लुइस डाट क्लार्क एट फाइजर डाट काम
स्रोत: बोहरिंगर इंगेलहेम जीएमबीएच एवं फाइजर इंक
पीआरन्यूजवायर- एशियानेट: रंजन