कार्बन उत्सर्जन पर रोक और भंडारण की वैश्विक परियोजनाएं चालू लेकिन इस पर तेजी से काम करने की जरूरत- ग्लोबल सीसीएस इंस्टीट्यूट रिपोर्ट का खुलासा

 
 
 
 
केनबरा, 28 अक्तूबर, मीडियानेट इंटरनेशनलएशियानेट
ग्लोबल कार्बन कैप्चर एंड स्टोरेज : सीसीएस : इंस्टीट्यूट ने आज एक रिपोर्ट जारी की जिसमें दिखाया गया है कि वर्ष 2020 तक वैश्विक स्तर पर कम से कम 20 व्यावसायिक स्तर की सीसीएस परियोजनाओं पर स्थापित जी 8 के उद्देश्य को हासिल करने के लिए कार्यवाही तेज की जा रही है इस प्रगति के बावजूद रिपोर्ट में यह भी दिखाया गया है कि शेष बचीं व्यावसायिक, तकनीकी और नियामक बाधाओं को देखते हुए सफलता सुनिश्चित करने के लिए परियोजनाओं का एक वृहद एवं ज्यादा प्रभावी पोर्टफोलियो की पहचान तथा इसे तेजी से आगे बढ़ाने की सख्त जरूरत है
स्ट्रैटजिक एनलिसिस आफ ग्लोबल स्टेटस आफ कार्बन कैप्चर एंड स्टोरेज’ नामक शीषर्क से तैयार इस रिपोर्ट में बताया गया है कि ज्यादातर उन्नत परियोजनाएं कोयले से संचालित उर्जा उत्पादन पर केंद्रित हैं
इसके लिए ऐसे समाधान लागू करने की जरूरत पर जोर दिया गया है जो कार्बन प्रभाव क्षेत्र वाले पर्यावरण में वैश्विक स्तर पर कोयले के चालू और भविष्य के इस्तेमाल पर काबू पा सके
अध्ययन में खुलासा किया गया है कि सीसीएस परियोजनाओं को शुरू करने में गति लाने के लिए विश्व को लागत के फायदे पर खास ध्यान देना चाहिए जो चीन और भारत जैसे विकासशील देशों की प्रगतिशील परियोजनाओं में मौजूद हैं और प्राकृतिक गैस प्रसंस्करण तथा खाद उत्पादन इकाइयों जैसे उद्योगों में कार्बन डाइआक्साइड कैप्चर उनकी डिजाइन के साथ ही लगा हुआ है अध्ययन में यह भी पुष्टि की गई है कि सीसीएस के लिए सीमेंट, अल्यूमीनियम, लौह तथा स्टील उद्योगों में और ज्यादा प्रयास किए जाने की जरूरत है जिससे कार्बन डाइआक्साइड के उत्सर्जन की दिशा में महत्वपूर्ण सहयोग मिला है
ग्लोबल सीसीएस इंस्टीट्यूट के सीईओ निक ओट्टर ने कहा, ‘‘हम जानते हैं कि कई सीसीएस तकनीकें उत्सर्जन कम करने में मदद करने के लिए उद्योगों के एक दायरे में आज लागू किए जाने के लिए उपलब्ध हैं
यह रिपोर्ट सिर्फ ज्यादा तेजी से अधिक से अधिक परियोजनाएं लागू करने की जरूरत पर जोर देती है बल्कि और ज्यादा जगहों पर कई अन्य तरह की परियोजनाएं शुरू करने की जरूरत पर भी जोर देती है ताकि हम सीसीएस के लिए बेहतरीन संभावित सुविधाओं का डिजाइन तैयार करने, लागत में कटौती करने और एक वैध व्यापारिक तथ्य निर्मित करने के तरीके सीख सकें ।’’ ग्लोबल सीसीएस इंस्टीट्यूटसीसीएस के मौजूदा स्तर की वैश्विक पैमाने पर व्यावसायिक स्थापना को गति प्रदान करने की एक पहलने वार्ली पार्सन के नेतृत्व में एक कंसोर्टियम गठित किया है जो विश्व की वर्तमान सीसीएस परियोजनाओं की सर्वाधिक व्यापक समीक्षा और विश्लेषण करता है
यह अनुसंधान सीसीएस परियोजनाओंे, लागत सहित समर्थक नीतिगत कार्यक्रमों, तलाशे जा रहे शोध एवं विकास प्रयासों की वस्तुस्थिति की समझ को वृहद बनाने के लिए किया गया है और इस स्तर पर विकास के अंतरों तथा बाधाओं को समझने के लिए किया गया है
वर्तमान में जो कदम उठाए जा रहे हैं उनकी गहन जानकारी को प्रदर्शित करने वाली इस रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष : तकरीबन 213 सक्रिय या नियोजित परियोजनाएं हैं जिनमें 101 व्यावसायिक पैमाने पर चलाई जा रही हैंपूरी दुनिया में जांच की जा रही संभावित परियोजनाओं की एक महत्वपूर्ण पाइपलाइन की उपस्थिति प्रस्तुत की गई है
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ऐसी पूर्ण एकीकृत, व्यावसायिक पैमाने की परियोजनाएं हैं जिनमें से प्रत्येक परियोजना सीओ2 कैप्चर, परिवहन तथा स्टोरेज की सीसीएस प्रोसेस श्रृंखला के प्रत्येक चरण को दर्शाती है इनमें से सात परियोजनाएं पहले से संचालित हैं और 55 परियोजनाएं जी 8 के मकसद में योगदान के लिए संभावित प्रत्याशी बनाए जाने के लिए प्रगति के विभिन्न चरणों में हैं
पूर्ण एकीकृत, व्यासायिक स्तर की परियोजनाओं के प्रमुख डेवलपरों को यूरोप :37 प्रतिशत:, अमेरिका :24 प्रतिशत :, आस्ट्रेलिया :11 प्रतिशत : और कनाडा : 10 प्रतिशत : में भागीदारी के लिए शामिल किया गया है जो एशिया, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका में अपेक्षाकृत कम वितरण करते हैं
रिपोर्ट में दिखाया गया है कि सीसीएस की व्यापक उन्नति के दौरान उच्च परियोजना की विफलता दरों के बड़े खतरे सामने आते हैं और यह नई प्रौद्योगिकियों के अधिग्रहण के दौरान मुख्य रूप से सामने आते हैं
लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक लक्षित परियोजना सहयोग और विकास के लिए उपयुक्त पहल करने के जरिये इस तरह के खतरे से निजात मिल सकती है
रिपोर्ट में सरकारों के लिए सिफारिशें भी पेश की गई हैं कि वे परियोजना संबंधी सफलता में आने वाली चुनौती से निपटने के लिए उद्योगों के साथ भागीदारी कर सकती हैं तीन बड़े मोचरें पर त्वरित कार्यवाही करने की सिफारिश की गई है : – अपने मुताबिक सफलता में सुधार लाने के लिए 55 सक्रिय या नियोजित पूर्ण एकीकृत परियोजनाओं के जरिये सक्रियता से काम करना
सीसीएस प्रौद्योगिकी में निवेश या नवीनता लाने के लिए राष्ट्रीय रणनीतियों का विकास करना जहां ऐसे कार्यक्रम शुरू किए जाने का अभाव है
एक नियामक ढांचा स्थापित करना जो कार्बन मूल्यों का मूल्यांकन कर सके, दीर्घकालीन स्टोरेज दायित्व का हल कर सके और महत्वपूर्ण अधोसंरचना को रेखांकित कर सके
निक ओट्टर ने कहा, ‘‘यह चुनौती तो बड़ी है लेकिन सरकारों को उर्जा सुनिश्चित करने के लिए नेतृत्व करने की जरूरत है और इसके लिए विशिष्ट क्षमता विकसित करनी होगी यह उर्जा कार्बन में जकड़े विश्व के लिए आवश्यक है ’’ उन्होंने कहा, ‘‘ग्लोबल सीसीएस इंस्टीट्यूट प्रतिदिन इस चुनौती से निपट रहा है अब हम पहली बार ऐसा स्थान प्राप्त कर लिया है जहां सीसीएस परियोजनाओं के सर्वाधिक व्यापक डाटाबेस रखे जा सकते हैं और अपने भागीदारों के साथ हम फास्ट ट्रैक वाली मुख्य परियोजनाओं के लिए इस जानकारी का इस्तेमाल कर सकेंगे ताकि विकास में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए सभी परियोजना समर्थकों को समर्थन करने की अनुमति प्रदान की जा सके ।’’स्ट्रैटजिक एनलिसिस आफ ग्लोबल स्टेटस आफ कार्बन कैप्चर एंड स्टोरेज’ नामक यह पूर्ण रिपोर्ट डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डाट ग्लोबलसीसीएसइंस्टीट्यूट डाट काम पर हासिल की जा सकती है
विशेष जानकारी के लिए कृपया संपर्क करें : चंद्रन विघ्नेश्वरन कम्युनिकेशंस एंड मीडिया ग्लोबल सीसीएस इंस्टीट्यूट फोन : 61 :0: 2 6175 5331 मोबाइल : 61 :0: 414 762 390 चंद्रन डाट विघ्नेश्वरन एट ग्लोबलसीसीएसइंस्टीट्यूट डाट काम स्रोत : ग्लोबल कार्बन कैप्चर एंड स्टोरेज :सीसीएस: इंस्टीट्यूट

संपादकों के ध्यानार्थ ग्लोबल सीसीएस इंस्टीट्यूट के बारे में : – ग्लोबल सीसीएस इंस्टीट्यूट एक कार्यक्रम है जो सीसीएस के पैमाने पर वैश्विक स्तर की व्यावसायिक स्थापना को गति प्रदान करता है और जहां सीओ 2 को जब्त किया जाता है और इसे बाहर निकालने के बाद सुरक्षित एवं दीर्घकालीन भंडारण के लिए इसे काफी अंदर भूमिगत कर दिया जाता है
ग्लोबल सीसीएस इंस्टीट्यूट को अभूतपूर्व अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिला है जिनमें 20 से ज्यादा देशों की सरकारें और 120 से ज्यादा प्रमुख कंपनियां, गैर सरकारी संगठन तथा शोध संगठन शामिल हैं जिन्होंने सदस्यों के तौर पर या सहयोगी भागीदारों के रूप में इसके साथ समझौता किया है
रिपोर्ट के बारे मेंमई 2009 में ग्लोबल सीसीएस इंस्टीट्यूट ने वार्ली पार्सन्स के नेतृत्व में एक कंसोर्टियम का गठन किया है जिसमें सीसीएस की वैश्विक वस्तुस्थिति का एक व्यापक सर्वेक्षण किए जाने के लिए श्कलंबरगर, बेकर मैककेंजी तथा इलेक्ट्रिक पावर रिसर्च इंस्टीट्यूट शामिल हैं
इसके रणनीतिक विश्लेषण में अनेक रिपोटरें को शामिल किया गया है जिसमें से पांचवीं रिपोर्ट एक संश्लेषित रिपोर्ट है
यह रिपोर्ट चार बुनियादी रिपोटरें का संक्षिप्त ब्योरा है और इसमें ग्लोबल सीसीएस इंस्टीट्यूट को कारगर रणनीतियां तथा सिफारिशें प्रदान करने के साथ ही मूल्यांकन के अंतर तथा चुनौतियां, जोखिम विश्लेषण और सीसीएस परियोजना विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है
पीआरन्यूजवायरएशियानेट : रंजन रंजन पीडब्ल्यूआर17 10301448 दि