विश्व के सर्वाधिक असुरक्षित मानव जाति की रक्षा के लिए नई वैश्विक स्वास्थ्य रणनीति जरूरी

 
 
01/11/2009 9:09:57:480AM
 
हनोई, 30 अक्तूबर, मीडियानेट इंटरनेशनलएशियानेट
आज मानव जाति में सर्वाधिक असुरक्षित गर्भधारण करने वाली वैसी महिलाएं हैं जो गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों में रहती हैं तथा उन्हें जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा खतरा है यह निष्कर्ष एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में निकाला गया है
हनोई में इस सप्ताह एकत्रित हुए स्वास्थ्य, विकास और मानवाधिकारों से जुड़े सैकड़ों विशेषज्ञ तथा अधिकारियों ने एक नई वैश्विक स्वास्थ्य रणनीति का आह्वान किया है उन्होंने कहा कि सर्वाधिक नुकसान झेलने वाली विश्व की जातिप्रति वर्ष बच्चों को जन्म देने के दौरान मरने वाली 500,000 महिलाओं सहित, का संकट तब तक नहीं सुलझाया जा सकता जब तक उनकी प्रत्येक स्वास्थ्य चुनौती को अलगथलग करके रखा जाए
सर्वाधिक असुरक्षित अरबों की इस आबादी के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए उनके अधिकार वंचित होने वाले प्रत्येक पहलू को निपटाया जाना चाहिए
ये क्षेत्र साफसफाई, पर्याप्त पोषण तथा आय से लेकर महामारी तथा जलवायु परिवर्तन से के कारण मौसम की ज्यादती, जल संकट तथा रोगों से उभरते वैश्विक खतरे तक से जुड़े हुए हैं
यूनिवर्सिटी आफ एनएसडब्ल्यू में स्वास्थ्य एवं मानवाधिकार के प्रोफेसर और सम्मेलन के सह अध्यक्ष डेनियल तरांतोला ने कहा, ‘‘इनमें से प्रत्येक चुनौती बेहद महत्वपूर्ण हैं लेकिन यदि हम प्रत्येक को अलगअलग निपटाएं तो हम मातृत्व मृत्यु दर खत्म करने का लक्ष्य नहीं हासिल कर सकते या खराब स्वास्थ्य तथा अकाल मृत्यु के अन्य बड़े क्षेत्रों में महत्वपूर्ण तरक्की नहीं कर सकते ।’’ इस सम्मेलन में वैश्विक स्तर पर एचआईवीएड्स के खिलाफ संसाधन जुटाने पर अभूतपूर्व एकजुटता देखी गई ये संसाधन निरंतर जुटाए तो जा रहे हैं लेकिन अपर्याप्त हैं और इस महामारी पर काबू पाने में नाकाम हो रहे हैं जिस वजह से इस रोग के हर वर्ष 27 लाख नए मामले सामने रहे हैं साथ ही निम्न और मध्य आय वाले देश अब एच 1 एन 1 तथा एवियन फ्लू जैसी महामारी के एक चरम खतरे पर पहुंच गए हैं क्योंकि इनके टीके और दवाओं की संपन्न देशों ने बड़े पैमाने पर जमाखोरी कर रखी है
तेज गति से बढ़ रहे औद्योगीकरण के कारण जलवायु परिवर्तन, बड़े पैमाने पर लोगों की गतिविधियां तथा पर्यावरण के स्तर में कमी से मौजूदा स्वास्थ्य समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं
वियतनामीज इंस्टीट्यूट आफ ह्यूमन राइट्स के पूर्व निदेशक और सम्मेलन के सह अध्यक्ष डा. चाओ डक थाई ने कहा, ‘‘यदि हम एक बार फिर वैश्विक स्वास्थ्य एजेंडा तय कर लेते हैं और स्वास्थ्य एवं विकास दोनों के अधिकारों पर जोर देते हैं तो हमारे पास कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से सफलतापूर्वक निपटने का सर्वोत्तम मौका हो सकता है ।’’ प्रोफेसर तरांतोला ने कहा कि स्थानीय समुदायों की भरपाई और रचनात्मकताअगर वैश्विक स्वास्थ्य नीतियों तथा फंड जैसी पहल तक नहीं की जाएनए स्वास्थ्य तथा विकास माडल के लिए कारगर हो सकती है
इंटरनेशनल कान्फ्रेंस आन रियलाइजेशन राइट्स टू हेल्थ डेवलपमेंट का सह प्रायोजन यूनिवर्सिटी आफ एनएसडब्ल्यू तथा वियतनाम में कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति की लोकप्रियतावादी तथा शिक्षा पर गठित केंद्रीय आयोग द्वारा किया गया
संयुक्त राष्ट्र, अटलांटिक मानव कार्यकर्ताओं, यूएसएआईडीपीईपीएफएआर, आसएड, लेवी स्ट्राउस फाउंडेशन तथा आस्ट्रेलियन फेडरेशन आफ एड्स संगठनों ने इस सम्मेलन के लिए अतिरिक्त सहयोग दिया
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