नई रिपोर्ट बताती है कि भविष्य के मोबाइल बैंकिंग का भविष्य चार ताकतें संवार सकती हैं

लंदन, 19 नवंबर, पीआरन्यूजवायरएशियानेट
सरकारें और उद्योग आने वाले दशकों में वित्तीय हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए विकल्प चुन सकते हैं
मोबाइल फोन बैंकिंग सहित शाखारहित बैंकिंग का बढ़ता इस्तेमाल ज्यादातर देशों में अब अपरिहार्य हो गया है लेकिन यह अब तक सुनिश्चित नहीं हो पाया है कि बैंक सेवा से वंचित बड़ी संख्या के गरीब बचत तथा ऋण जैसी सुविधाओं के लिए भुगतान किए बगैर अपनी वित्तीय सेवाओं के लिए इन वैकल्पिक चैनलों का इस्तेमाल कर पाएंगे भी या नहीं ऐसा विश्व बैंक में स्थित एक माइक्रोफाइनेंस समूह सीजीएपी तथा ब्रिटेन के डिपार्टमेंट फार इंटरनेशनल डेवलपमेंट : डीएफआईडी : द्वारा तैयार की गई एक नई रिपोर्ट ‘‘वर्ष 2010 में शाखारहित बैंकिंग के परिदृश्य’’ में कहा गया है
ब्रिटेन के व्यापार और विकास मंत्री गेरेथ थामस ने आज कहा : ‘‘सच्चाई यह है कि फिलहाल बैंक का इस्तेमाल नहीं करने वाले 2.7 अरब लोगों में से ज्यादातर लोग वर्ष 2010 तक मोबाइल फोन तथा इंटरनेट जैसी शाखारहित बैंकिंग पद्धतियां हासिल करेंगे तो विकासशील देशों में लोगों के लिए वित्तीय सुविधा की दिशा में यह एक बड़ी पहल साबित होगी
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गरीबों को जब तक वित्तीय भागीदारी से अलग रखा जाएगा तब तक वे गरीबी में ही जीते रहेंगे इसका मतलब है कि उनके पास धन की बचत करने की सुरक्षित जगह का अभाव है, अपने भविष्य के लिए निवेश का अवसर पाने से वंचित हैं और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान अपनी बचत को नुकसान से बचाने का जोखिम वे कम नहीं कर सकते हैं
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जैसा कि इस रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकारें और निजी क्षेत्र दोनों की निवेश सुनिश्चित करने में एक बड़ी भूमिका हो सकती है और ये दोनों अरबों गरीब लोगों को प्रौद्योगिकी आधारित वित्तीय सेवाओं की आपूर्ति में सहायक हो सकते हैं ।’’

इस रिपोर्ट में भविष्य की शाखारहित बैंकिंग पर चार परिदृश्यों को निर्धारित किया गया है इन सभी चार परिदृश्यों में शाखारहित बैंकिंग सेवाओं के अधिग्रहण और उपयोग को लेकर भविष्यवाणी की गई है कि वर्ष 2010 तक आज की तुलना में काफी ज्यादा हो जाएगा लेकिन इसके दो परिदृश्यों में तीव्र वृद्धि का दौर फालआफ या समान रूप से विकास की अवधि से ही आएगा
सीजीएपी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी एलिजाबेथ लिटलफील्ड ने कहा, ‘‘मोबाइल बैंकिंग की शीर्ष कंपनियों ने हमारी उम्मीद बढ़ाई है कि लाखों गरीब लोग, खासकर गरीब क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आखिरकार बैंकिंग प्रणाली से ही सेवाएं दी जा सकती हैं कहने का मतलब है कि नए व्यापारिक माडल तथा बैंकों और बैंकिंग एजेंटों को सही प्रोत्साहन देने वाली भागीदारियां काफी अहम साबित हो सकती हैं, यदि हम महज भुगतान और हस्तांतरण के बगैर अन्य बुनियादी बैंकिंग सेवाओं, खासकर बचत के संदर्भ में, की पेशकश के लिए सक्षम हो सकते हैं जिनकी गरीब लोगों को जरूरत भी है और वे ऐसा चाहते भी हैं ।’’

यह रिपोर्ट छह महीने की परिदृश्यनिर्माण परियोजना का निष्कर्ष है जिसमें 30 से ज्यादा देशों के प्रौद्योगिकी और वित्तीय क्षेत्रों से जुड़े तकरीबन 200 प्रमुखों को शामिल किया गया
आज की शाखारहित बैंकिंग के मुख्य अंशवित्तीय संलग्नता ज्यादातर देशों में बढ़ रही है अक्सर यह शाखाओं और आटोमेटेड टेलर मशीन : एटीएम : जैसे परंपरागत बैंकिंग चैनलों के विस्तार के परिणास्वरूप देखा गया है, – ब्रिक्सएंडमोर्टार वृद्धि इसकी लागत के अनुरूप सीमित होती है शाखारहित बैंकिंग एक सस्ता विकल्प पेश करती है लेकिन आज की तारीख तक ज्यादातर देशों में इसकी सिर्फ परिष्कृत पहुंच ही बन पाई है, – जहां कहीं भी शाखारहित बैंकिंग लागू है, वहां आम तौर पर निम्नलिखित तत्व काम करते हैं : :1: भविष्य की लाभदेयता में उद्योग का भरोसा, :2: नियामक परिवर्तन को सक्षम बनाना, :3: कनेक्टिविटी लागत में आश्चर्यजनक कमी, :4: मौजूदा नेटवर्कों का इस्तेमाल करते हुए नगद प्रबंधन करने वाले एजेंटों की नियुक्ति तथाशाखारहित बैंकिंग की क्षमता के बारे में मौजूदा अटकलबाजी वास्तविकता से कहीं ज्यादा बताई जा रही है
गरीबों तक पहुंच बनाने की व्यापक स्थायी सफलता के लिए गरीब लोगों की वित्तीय जरूरतों तथा स्वीकार्य बर्ताव पर कहीं ज्यादा सटीक गहनता की आवश्यकता है इसे अब उपलब्ध कराने के लिए सिर्फ शुरू किया जा रहा है
वर्ष 2010 में शाखारहित बैंकिंग को आकार देने वाली चार ताकतेंडेमोग्राफिक परिवर्तनबाजार में आने वाले युवा उपभोक्ताओं की अधिकतम संख्या और कम से कम देशों के अंदर ही अधिक से अधिक भ्रमण करने वाले लोगों को शामिल करनाइससे शाखारहित बैंकिंग की स्वीकार्यता के लिए अनुकूल माहौल बनेगा, – कार्यकारी सरकारें वित्तीय क्षेत्रों, सामाजिक सुरक्षा तंत्र के प्रदाताओं तथा कम खर्च वाले बैंक खातों एवं वित्तीय अधोसंरचना शुरू करने वाले प्रदाताओं या इसे प्रोत्साहन देने वाले बैंकों के नियामक के तौर पर एक अहम भूमिका निभाएंगे यह व्यापक भूमिका वित्तीय संलग्नता के लिए मददगार साबित हो सकती है, – नगदी को लेकर अपराध पर सुरक्षा संबंधिी चिंताएं इलेक्ट्रानिक विनिमय चैनलों की स्वीकार्यता संचालित करेंगी
साथ ही इलेक्ट्रानिक अपराध में होने वाली वृद्धि से उपभोक्ताओं का विश्वास प्रभावित होगा और वित्तीय प्रदाताओं के जोखिम प्रबंधन का वे पहले परीक्षण करेंगे तथामोबाइल फोन के जरिये इंटरनेट ब्राउसिंग वित्तीय लेनदेन की लागत में कटौती करेगी और वित्तीय सेवाओं की पेशकश के लिए नई कंपनियों को सक्षम बनाएगी
सीजीएपी और जीएसएमए के शोधकर्ताओं ने पाया है कि अफ्रीका, लैटिन अमेरिका तथा एशिया में बड़ी संख्या में ऐसे लोग मौजूद हैं जिनके पास कोई बैंक खाता नहीं है लेकिन उनके पास मोबाइल फोन भी नहीं है यह संख्या आज की तारीख में एक अरब है जो वर्ष 2012 तक बढ़कर 1.7 अरब तक पहुंच सकती है ‘‘अनबैंक्ड मोबाइल’’ वाले ये लोग सेवा प्रदाताओं के लिए एक बाध्यकारी बाजार अवसर प्रदान करते हैं
संपादकों के ध्यानार्थ यह रिपोर्ट आज लंदन में डीएफआईडी द्वारा जारी की जाएगी वाशिंगटन डी.सी. से एक दिसंबर को सीजीएपी टेक्नोलाजी के ब्लाग पर इसका लाइव वेबकास्ट प्रसारित किया जाएगा अधिक जानकारी के लिए देखें एचटीटीपी : टेक्नोलाजी डाट सीजीएपी डाट ओआरजी

सीजीएपी विश्व के गरीबों तक एडवांसिंग वित्तीय पहुंच उपलब्ध कराने के लिए समर्पित एक स्वतंत्र नीति और शोध केंद्र है इसे 30 से ज्यादा विकास एजेंसियों और निजी संस्थाओं द्वारा समर्थन मिला हुआ है जो गरीबी उन्मूलन के लिए एक साझा उद्देश्य की भागीदारी करते हैं विश्व बैंक में स्थित सीजीएपी बाजार की तीक्ष्णता प्रदान करती है, मानकों को बढ़ावा देती है, नवीनतम समाधानों को विकसित करती है और सरकारों, माइक्रोफाइनेंस प्रदाताओं, दाताओं तथा निवेशकों को सलाहकार सेवाओं की पेशकश करती है अधिक जानकारी एचटीटीपी : डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डाट सीजीएपी डाट ओआरजी पर उपलब्ध है
डिपार्टमेंट फार इंटरनेशनल डेवलपमेंट ब्रिटिश सरकार का विभाग है जो गरीब देशों को ब्रिटिश सहायता का प्रबंधन करता है और घोर गरीबी से निजात दिलाने का काम करता है इस विभाग के बारे में आप इस वेबसाइट पर विस्तृत जानकारी हासिल कर सकते हैं डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डाट डीएफआईडी डाट जीओवी डाट यूके डीएफआईडी ने हाल ही में एक फैसिलिटेटिंग एक्सेस टू फाइनेंशियल सर्विसेज थ्रू टेक्नोलाजी परियोजना शुरू की है
यह परियोजना केन्या, तंजानिया, पाकिस्तान, नाइजीरिया, भारत, बांग्लादेश और घाना जैसे विकासशील देशों के बड़े बाजारों में ‘‘शाखारहित बैंकिंग’’ शुरू करने में सहयोग के लिए शुरू की गई है इसकी पायलट परियोजनाओं का मूल्यांकन वित्तीय तथा प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों की टीमों द्वारा किया जाता है और जहां कहीं भी उपयुक्त मदद और प्रोत्साहन बढ़ाने की जरूरत होती है, इन परियोजनाओं को विभिन्न देशों में उसी स्तर पर या प्रसारित किया जाता है
स्रोत : सीजीएपी संपर्क : जिम रोसेनबर्ग, 1 202 473 1084, जेरोसेनबर्ग एट वर्ल्डबैंक डाट ओआरजी, सीजीएपी के लिए, या डीएफआईडी प्रेस कार्यालय, 44 :0: 207 023 0600 पीआरन्यूजवायरएशियानेट : रंजन रंजन पीडब्ल्यूआर36 11181432 दि