स्वच्छता की राह : नया शोध बताता है कि चीन कैसे न्यूनतम कार्बन उत्सर्जन पर विकास कर सकता है

 बीजिंग, 8 दिसंबर, पीआरन्यूजवायरएशियानेट
एक विस्तृत आर्थिक अध्ययन से आज जारी हुए परिणामों में बताया गया है कि चीन कार्बन उत्सर्जन की मात्रा में अत्यधिक कटौती कर सकता है और अगले 40 वषरें तक अपनी अर्थव्यवस्था पर इसका कोई असर नहीं होने दे सकता है चीन के अर्थशास्त्रियों की 50 फोरम और स्टाकहोम एनवायरनमेंट इंस्टीट्यूट द्वारा तैयार की गई गोइंग क्लीन : इकोनामिक्स आफ चाइना’ज लो कार्बन डेवलपमेंट नामक रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2050 तक उत्सर्जन में कटौती उदाहरण के तौर पर निम्नलिखित स्रोतों के जरिये की जा सकती है : – संवर्धित बिल्डिंग डिजाइन, इलेक्ट्रिकल एप्लाइंसेज के मानकों और निम्न उर्जा उत्सर्जन पदाथरें के जरिये उर्जा क्षमता बढ़ाई जा सकती है
पवन और सौर उर्जा, नगर निगम के ठोस अवशिष्टों और बायोमास तथा छोटे हाइड्रोपावर जैसी अक्षय उर्जा के इस्तेमाल की ओर व्यापक तरीके से अभिमुख किया जाए
सड़क परिवहन के लिए इलेक्ट्रिक वाहनकोयले से संचालित होने वाले नए बिजली संयंत्रों में कार्बन कैप्चर और भंडारण तकनीकी का इस्तेमालविकसित देशों से अधिक वित्तीय और प्रौद्योगिकियों को चैनल करने वाली एक बेहतर अंतरराष्ट्रीय सहयोग यांत्रिकी चीनी, स्वीडिश, जर्मन, ब्रिटिश और अमेरिकी विशेषज्ञों की रिपोर्ट में कहा गया है कि इन बदलावों से चीन को भी अपनी उर्जा सुरक्षा में सुधार लाने के लिए नए अवसर मिलेंगे और अंतरराष्ट्रीय मूल्य श्रृंखला की उंचाई तक इसकी अर्थव्यवस्था पहुंच सकती है
चीन में नेशनल इकोनामिक रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक डा. फैन गैंग ने कहा, ‘‘निम्न कार्बन उत्सर्जन वाले देश चीन में एक विशाल सेवा क्षेत्र और ज्यादा एडवांस श्रम दक्षता तथा पर्यावरण के कम क्षरण की क्षमता यहां मौजूद हैं इस तरह का बदलाव चीन के विकास का भी एक आवश्यक हिस्सा हो सकता है ।’’ चीन वर्तमान में विश्व के दस शीर्ष ऐसे देशों में है जो कार्बनइंटेंसिव अर्थव्यवस्थाओं में गिने जाते हैं जिसका मतलब है कि आर्थिक गतिविधि के स्तर के संबंध में इसके पास कार्बन की मौजूदगी अत्यधिक है
रिपोर्ट के लेखक और लंदन स्कूल आफ इकोनामिक्स के प्रोफेसर लार्ड निकोलस स्टर्न ने कहा, ‘‘विश्व को खतरनाक स्तर पर पहुंच चुके जलवायु परिवर्तन को खत्म करना जरूरी हो गया है और इसके लिए वैश्विक स्तर पर उत्सर्जन में कटौती के लिए कार्यवाही करनी होगी विकसित देश पूर्व में वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में बढ़ोतरी के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार माने गए हैं लेकिन इस संबंध में भविष्य की जिम्मेदारी विकसित तथा विकासशील देशों के लिए समान रूप से है यह महत्वपूर्ण रिपोर्ट दर्शाती है कि चीन अपने कार्बन उत्सर्जन में कटौती के लिए ठोस एवं निर्णायक पहल कर सकता है और साथ ही अपनी अर्थव्यवस्था का विकास निरंतर जारी रख सकता है जिससे वह अपने लोगों के लिए एक संपन्न तथा सौहार्दपूर्ण समाज बना सके ।’’ रिपोर्ट के लेखक, पाट्सडैम इंस्टीट्यूट आफ क्लाइमेट इम्पैक्ट रिसर्च के उप निदेशक तथा मुख्य अर्थशास्त्री प्रोफेसर ओटमर इडेनहोफर ने कहा, ‘‘चीन उन देशों में शुमार होगा जहां जलवायु परिवर्तन के खतरनाक स्तर पर पहुंचने के कारण सर्वाधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा लिहाजा खतरनाक स्तर पर जलवायु परिवर्तन को रोकना चीन के सर्वश्रेष्ठ हित में होगा
यह अध्ययन दर्शाता है कि चीन उत्सर्जन में महत्वाकांक्षी कटौती करने के साथ ही एक उच्च आर्थिक विकास राह अपना सकता है यही वजह है कि चीन में इस बदलाव की दिशा में अन्य अर्थव्यवस्थाओं को प्रेरित होने के लिए रोल माडल बनने की क्षमता है ।’’ गोइंग क्लीन जैविक ईंधन में सब्सिडी खत्म करने की सिफारिश करता है और कार्बन की कीमत अत्यधिक रखने के पक्ष में है, चाहे यह कीमत कार्बन पर कर लगाते हुए तय की जाए या वैश्विक कैपएंडट्रेड सिस्टम के जरिये डा. फैन गैंग ने कहा, ‘‘आज की कम कीमत के कारण निम्न कार्बन उत्सर्जन की ओर रुख करने की पहल ज्यादा कारगर नहीं हो पा रही है लेकिन इसे बदला जा सकता है ।’’ रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन के लिए तकनीकी रूप से ऐसा करना संभव है जिसके तहत वह 2 डिग्री पाथवे तक पहुंच सकता है और आकलन कर सकता है कि न्यूनतम उर्जा का इस्तेमाल और कार्यकुशलताओं से बचत आंशिक रूप से इस परिवर्तन की लागत को कम करेगी स्टाकहोम एनवायरनमेंट इंस्टीट्यूट के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर जोहान राकस्ट्राम ने कहा, ‘‘अब तक उच्च आय वाले देश वैश्विक स्तर पर सबसे ज्यादा हिस्से के उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं और उन्हें विकासशीलदेशों की वित्तीय मदद करते हुए इस जिम्मेदारी को स्वीकार करना चाहिए ।’’

इसे हकीकत बनाने के लिए गोइंग क्लीन एक नई अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था का प्रस्ताव देता हैइंटरकंट्री ज्वाइंट मिटिगेशन प्लानजो वित्तीय प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का एक वृहद और कारगर तरीका होगा ।’’ नार्डिक बैंक एसईबी में वरिष्ठ अर्थशास्त्री और अध्ययन के लेखक क्लास एकलुंड ने कहा, ‘‘खपत और उत्पादन के तरीकों को भी एक अधिक संसाधनस्थायी निर्देश में बदलने की जरूरत है विश्व में सर्वाधिक आबादी वाला और ग्रीनहाउस गैसों का सबसे बड़ा उत्सर्जन देश के तौर पर चीन की भूमिका वैश्विक जलवायु परिवर्तन पर विजय पाने के लिए महत्वपूर्ण मानी गई है इस प्रकार उत्सर्जन में कटौती के लिए प्रभावशाली तरीके से आर्थिक उपकरण बेहद आवश्यक हैं ।’’ निम्न कार्बन अर्थव्यवस्था की ओर रुख करने से कोयले से संचालित उर्जा और कुछ भारी उद्योग प्रभावित होंगे लेकिन इससे नएग्रीन रोजगार’ भी सृजित होंगे वर्ष 2009 की पहली छमाही में चीन ने अमेरिका की तुलना में ज्यादा पवन उर्जा टर्बाइन बनाए हैं निम्न कार्बन से चलने वाला परिवहन भी बढ़ रहा हैवर्तमान में इस देश में पांच करोड़ से ज्यादा इलेक्ट्रिक बाइक्स तथा मोटरसाइकिल हैं
चीन अब इलेक्ट्रिक कारों का विशाल उत्पादन करने के मामले में भी नेतृत्व कर रहा है
प्रोफेसर जोहान राकस्ट्राम ने कहा, ‘‘इस कठिन अर्थव्यवस्था के दौर में जलवायु परिवर्तन की कार्यवाही लागत की तुलना में अधिक अवसर पेश कर सकती है चीन और शेष विश्व के लिए इस तरह का परिवर्तन आसान नहीं होगा लेकिन यह संभव है, जरूरी है और लक्ष्य पाने के लिए महत्वपूर्ण है ।’’ चाइनीज 50 इकोनामिस्ट फोरम एक बीजिंग स्थित समूह है जिसमें सामूहिक शोध और चीन की अर्थव्यवस्था पर सार्वजनिक चर्चा के लिए चीन के अर्थशास्त्री शामिल हैं स्टाकहोम एनवायरनमेंट इंस्टीट्यूट एक स्वतंत्र, गैर लाभकारी शोध संगठन है जो स्थायी विकास के लिए विज्ञान और नीति को मजबूती प्रदान करता है
गोइंग क्लीन इकोनामिक्स आफ चाइना’ज लोकार्बन डेवलपमेंट को बीजिंग के रैफल्स बीजिंग होटल में 8 दिसंबर 2009 को 12.00 बजे लांच किया गया था
इस रिपोर्ट को एचटीटीपी : डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डाट एसईआईइंटरनेशनल डाट ओआरजी से डाउनलोड किया जा सकता है
स्रोत : स्टाकहोम एनवायरनमेंट इंस्टीट्यूट एंड चाइनीज इकोनामिस्ट्स पीआरन्यूजवायरएशियानेट : रंजन रंजन पीडब्ल्यूआर83 12101526 दि