सेरेब्रल पल्सी का अध्ययन बढ़े हुए खर्च और बायसेस को खत्म करता है

 
 
29/07/2010 10:37:20:820AM
 
सेरेब्रल पल्सी का अध्ययन बढ़े हुए खर्च और बायसेस को खत्म करता है
इरविन, कैलिफोर्निया, 28 जुलाई, पीआरन्यूजवायरएशियानेट
इस मामले में थोड़ा ही बहुत ज्यादा हैहाइपरबेरिक आक्सीजन थेरापी : एचटीटीपी : डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डाट आईहाउसा डाट ओआरजी, रिसोर्सेज, लैंसेट डाट पीडीएफ : से सेरेब्रल पल्सी के उपचार पर किया गया एक नया अध्ययन भारत और अमेरिका में तहलका मचा रहा है आक्यूपेशनल, फिजिकल, स्पीच थेरापीज और एचबीओटी : एचटीटीपी : डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डाट आईहाउसा डाट ओआरजी : जैसी मानक पुनर्वास चिकित्सा पद्धतियों के मिश्रित रूप पर केंद्रित न्यूरोडेवलपमेंट सुधार हासिल करने के लिए किया गया यह अध्ययन बच्चों के नमूने पर आधारित सबसे बड़ा अध्ययन है एचबीओटी आक्सीजनवाहक रक्त कोशिकाओं और शरीर के सभी द्रव के जरिये शरीर में आक्सीजन अणुओं की मात्रा बढ़ाती है
इसके तहत एक व्यक्ति ट्रीटमेंट चैंबर में प्रवेश करता है और हवा का दबाव वायु तथा आक्सीजन के ज्यादा से ज्यादा अणुओं के साथ कंप्रेस्ड किया जाता है बाद में एचबीओटी ने मीडिया की तरफ ज्यादा ध्यान आकषिर्त किया और एथलीट का इस्तेमाल करते हुए उसे चोटिल अवस्था, डायबिटीक लिटेरली सेविंग लिंब्स से निजात दिलाता है और इसका प्रशिक्षण देता है इसके जरिये मरीज प्रतिरोधी बैक्टीरिया को खत्म करने में सक्षम हो पाता है और हाल ही में न्यूरोलाजीब्रेन के क्षतिग्रस्त होने, ट्रौमा तथा डिसआर्डर में इसे नए तरीके से क्रियान्वित किया गया है
दरअसल भारत से बाहर किया गया यह नया अध्ययन सेरेब्रल पल्सी : सीपी : से पीड़ित बच्चों के उपचार में सिर्फ हवा : पर्याप्त मात्रा में : या आक्सीजन समृद्धता के इस्तेमाल से विभिन्न हाइपरबेरिक दबाव के इस्तेमाल की तुलना करता है यह अध्ययन दर्शाता है कि कम दबाव वाली एंबियंट एयर हाइपरबेरिक थेरापी : 1.3 एटमासफेयरएटीए : सीपी के उपचार में 100 फीसदी आक्सीजन : 1.5 या 1.75 एटीए : के उच्च दबाव की तुलना में अधिक या उतना ही प्रभावशाली होती है
बच्चों पर अध्ययन एक गैर लाभकारी संगठन उड़ान डिसेबल्ड चिल्ड्रेंस सेंटर के निदेशक डा. अरुण मुखर्जी द्वारा किया गया इसे भारत के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा मान्यता एवं सहयोग प्रदान किया गया
सह लेखक डा. पियरे मैरोइस : कनाडा की मांट्रियल स्थित मैकगिल यूनिवर्सिटी : की मदद से किया गया यह उल्लेखनीय अध्ययन विषयों की संख्या के विस्तार और एक सटीक प्लेसबोकंट्रोल टेस्टिंग पद्धति के जरिये वर्ष 1999 में किए गए मैकगिल अध्ययन : एचटीटीपी : डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डाट आईहाउसा डाट ओआरजी, रिसोर्सेज, पार्ट’202 डाट पीडीएफ : :लैंसेट, फरवरी 2001 : को और ज्यादा विकसित करता है स्पास्टिक डिप्लेजिया सेरेब्रल पल्सी के क्रियात्मक उपचार से जुड़े विषयों में चार में से एक हाइपरबेरिक विकल्प को शामिल किया गया है इसके अलावा इसमें कुछ मानक उपचार पद्धतियां भी शामिल हैं : 1. प्लेसबो थेरापी : 20 विषय :, 2. दबाव के तहत 1.3 एटीए : 36 विषय : की सांस लेने योग्य पर्याप्त वायु पर हाइपरबेरिक थेरापी, एटीए : 32 विषय : पर सांस लेने के 100 फीसदी आक्सीजन के साथ हाइपरबेरिक थेरापी तथा 4. 100 फीसदी आक्सीजन :58: के साथ 1.75 एटीए सभी विषय प्लसबो प्रभाव के किसी भी लक्षण को खत्म करने के उपचार निष्कर्ष के बाद छह महीने के पुनर्मूल्यांकन पर आधारित हैं यह अध्ययन उपचार पद्धति : प्लेसबो ग्रुप ने जिसमें बेहद कम या कोई सुधार नहीं देखा है : पाने वाले सभी तीन समूहों में उल्लेखनीय सुधार प्रदर्शित करता है सिर्फ वायु के जरिये 1.3 एटीए में प्रदर्शित आंशिक पसंद : कोग्नेटिव सुधार : के साथ अन्य उपचार पद्धतियों में कोई महत्वपूर्ण सुधार अंतर नहीं देखा गया
मैकग्रिल के अध्ययन के साथ जुड़े ये नतीजे हाइपरबेरिक उद्योग की पूर्ववर्ती अटकलों को दरकिनार करते हैं जिसमें उच्च दाब के तहत 100 फीसदी आक्सीजन एक उत्कृष्ट उपचार है, ‘‘थोड़ा ज्यादा ही बेहतर है’’ की उपचार पद्धति के पक्षपाती होने की बात झूठी है कोग्नेटिव डेवलपमेंट के क्षेत्रों में मिल्डर थेरापी इस तरीके से मस्तिष्क में रक्त नलिकाओं : वैसोकंस्ट्रिक्शन: की संकीर्णता पर आघात नहीं करती है जैसा कि अन्य पद्धतियों में किया जाता है
इस प्रकार इसके जरिये निर्बाध तरीके से उत्तकों के माध्यम से अतिरिक्त आक्सीजन प्रवाहित करने की सुविधा मिलती है
डा. मुखर्जी स्वीकार करते हैं, ‘‘इसमें इस ओर ध्यान दिया गया है कि कहीं ज्यादा किफायती हल्की हाइपरबेरिक थेरापी खर्चीले उच्च दाब के हाइपरबेरिक थेरापी का हासिल करने योग्य विकल्प है और इसमें मरीजों की देखभाल के मानक से समझौता नहीं किया जाता है ।’’ यह अध्ययन अन्य न्यूरोलाजिकल परिस्थितियों के लिए भी दूरवर्ती क्रियान्वयन करता है वेटेरंस, स्ट्रोक तथा आस्टिज्म की रिकवरी के लिए ट्रौमेटिक ब्रेन इंजरी के उपचार में होने वाले बेतहाशा खर्च को देखते हुए यह अध्यन उन परिवारों के लिए एक उम्मीद पैदा करता है जो इस अत्यधिक पसंदीदा उपचार पद्धति का भार उठाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं
डा. अरुण मुखर्जी भारत के नई दिल्ली स्थित मजीदिया हास्पीटल और हमदर्द यूनिवर्सिटी के इंटरनल मेडिसीन विभाग में सीनियर कंसल्टेंट हैं और वह इंटरनेशनल हाइपरबेरिक्स एसोसिएशन के सदस्य भी हैं
एचटीटीपी : डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डाट आईहाउसा डाट ओआरजी स्रोत : इंटरनेशनल हाइपरबेरिक्स एसोसिएशन संपर्क : सन्नी हिल, इंटरनेशनल हाइपरबेरिक्स एसोसिएशन में पब्लिक रिलेशंस के निदेशक, 1 877 442 8721, एसहिल एट आईहाउसा डाट ओआरजी पीआरन्यूजवायरएशियानेट : रंजन रंजन पीडब्ल्यूआर16 07281502 दि
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