24 सप्ताह के तीसरे चरण के अध्ययन में पाया गया कि जब टाइप 2 डायबिटीज मेलिटस से पीड़ित युवाओं में ग्लिमेपायराइड के साथ अनुसंधानात्मक दवा डेपाग्लिफ्लोजि

24 सप्ताह के तीसरे चरण के अध्ययन में पाया गया कि जब टाइप 2 डायबिटीज मेलिटस से पीड़ित युवाओं में ग्लिमेपायराइड के साथ अनुसंधानात्मक दवा डेपाग्लिफ्लोजि
 
22/09/2010 1:10:17:830AM
 
24 सप्ताह के तीसरे चरण के अध्ययन में पाया गया कि जब टाइप 2 डायबिटीज मेलिटस से पीड़ित युवाओं में ग्लिमेपायराइड के साथ अनुसंधानात्मक दवा डेपाग्लिफ्लोजिन को शामिल किया गया तो ग्लायकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन : एचबीए1सी : में सुधार देखा गया
 स्टाकहोम, 20 सितंबर, पीआरन्यूजवायरएशियानेट
ब्रिस्टलमायर्स स्क्विब कंपनी : एनवाईएसई, बीएमवाई : : एचटीटीपी : डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डाट बीएमएस डाट काम : और एस्ट्राजेनेका : एनवाईएसई, एजेडएन : : एचटीटीपी : डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डाट एस्ट्राजेनेकायूएस डाट काम : ने आज रैंडमाइज्ड तथा डबल ब्लायंड फेज 3 क्लिनिकल अध्ययन के नतीजों की घोषणा की जो बताता है कि सिर्फ ग्लिमेपायराइड की अपेक्षा मौजूदा ग्लिमेपायराइड : सल्फोनिल्यूरिया : थेरापी टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित युवा मरीजों में ग्लायकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन लेवल : एचबीए1सी : की आश्चर्यजनक कमी लाती है
स्टाकहोम यह अध्ययन यह भी प्रदर्शित करता है कि 24 सप्ताह के दौरान डेपाग्लिफ्लोक्सिन प्लस ग्लिमपायराइड से प्लेसबो प्लस ग्लिमपायराइड की तुलना में शरीर के कुल वजन, ओरल ग्लूकोज टालरेंस टेस्ट : ओजीटीटी : तथा बेसलाइन से फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज : एफपीजी : स्तरों में बदलाव के सेकेंडरी एफिकेसी एंडप्वाइंट्स कमी हासिल हुई है डेपाग्लिफ्लोक्सिन तथा ग्लिमेपायराइड का सेवन करने वाले ज्यादातर मरीज सिर्फ ग्लिमेपायराइड लेने वाले मरीजों की तुलना में 7 प्रतिशत से भी कम एचबीए1सी का लक्ष्य हासिल करने में सक्षम रहे हैं इस अध्ययन के नतीजे 46वें यूरोपीय एसोसिएशन फार स्टडी आफ डायबिटीज : ईएएसडी : की सालाना बैठक में प्रस्तुत किए गए
कुल मिलाकर दवा से जुड़ी विपरीत परिस्थितियों की फ्रिक्वेंसी को उपचार समूहों के बीच समान दर से दर्ज किया गया हालांकि इनके संकेत, लक्षण तथा अन्य रिपोर्ट वंशानुगत शारीरिक संक्रमण, यूरीनरी क्षेत्र का संक्रमण नहीं, डेपाग्लिफ्लोक्सिन से उपचार वाले विषयों में कहीं ज्यादा फ्रिक्वेंसी की रिपोर्ट देने वाले रहे
एक शोधपरक कंपाउंड डेपाग्लाइफ्लोक्सिन पहली श्रेणी का सोडियमग्लूकोज कंट्रांसपोर्टर-2 : एसजीएलटी2: इनहिबिटर है और टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित युवा मरीजों के इलाज के लिए दिन में एक बार ओरल थेरापी के तौर पर ब्रिस्टलमायर्स स्क्विब तथा एस्ट्राजेनेका द्वारा साझा विकास के तहत फिलहाल फेज 3 के परीक्षण दौर में है इंसुलिन मैकेनिज्म में स्वतंत्र रूप से काम करने वाला एसजीएलटी2 इनहिबिटर्स पेशाब के रास्ते ग्लूकोज तथा इससे जुड़ी कैलोरी उत्सर्जित करता है और इस प्रकार ब्लड ग्लूकोज का स्तर कम किया जाता है
अध्ययन के प्रमुख अनुसंधानकर्ता और जेब्रजी : पोलैंड : स्थित डिपार्टमेंट आफ इंटरनल डिजीज डायबिटोलाजी एंड नेफ्रोलाजी सिलेसिन मेडिकल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर क्रिजिस्टफ स्ट्रोजेक ने कहा, ‘‘टाइप 2 डायबिटीज में हम मरीजों में अक्सर ग्लायकेमिक कंट्रोल की लगातार कमी देखते हैं जिसमें अतिरिक्त ड्रग थेरापी के साथ साथ उपचार की गति तेज करने की आवश्यकता पड़ती है
इस खोजपरक कंपाउंड के लिए उपलब्ध फेज 3 डाटा में शामिल यह अध्ययन दर्शाता है कि डेपाग्लायफ्लोक्सिन से ग्लायसेमिक कंट्रोल में सुधार हुआ है जैसा कि टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित युवा मरीजों में एचबीए1सी, एफपीजी तथा पीपीजी द्वारा आकलन किया गया है जब उन्हें आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले ओरल डायबिटीक एजेंटग्लिमपिराइड से इलाज प्रक्रिया में शामिल किया जाता है ।’’ अध्ययन के बारे में यह अध्ययन 24 सप्ताह तक चलाया गया मल्टीसेंटर, अंतरराष्ट्रीय, रैंडमाइज्ड, समांतर समूह, डबलब्लायंड, प्लेसबो नियंत्रित फेज 3 अध्ययन है जिसे टाइप 2 से पीड़ित युवा मरीजों में ग्लायसेमिक कंट्रोल सुधारने के तहत ग्लिपिराइड : 4 मिग्रा रोजाना : में एडआन थेरापी के तौर पर प्लेसबो की तुलना में डेपाग्लिफ्लोक्सिन : 2.5 मिग्रा, 5 मिग्रा या 10 मिग्रा रोजाना : की प्रभावशीलता परखने के लिए डिजाइन किया गया था यह अध्ययन 24 हफ्ते के बेसलाइन पर एचबीए1सी लेवल में बदलाव के तहत किया गया और इसमें 24 हफ्ते का डबलब्लायंड विस्तार शामिल किया गया
इस अध्ययन में टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित 597 मरीजों : 18 वर्ष के या इससे अधिक उम्र वाले : को अपर्याप्त ग्याइसेमिक कंट्रोल : एचबीए1सी 7.0 प्रतिशत या इससे अधिक और 10 प्रतिशत बेसलाइन पर : के साथ शामिल किया गया जिसमें सिर्फ ग्लिमेपिराइड की कम से कम आधी अधिकतम अनुमोदित खुराक मरीजों को दी गई प्रत्येक मरीज को चार में से एक मरीज को समान रूप से रैंडमाइज किया गया : डेपाग्लिफ्लोक्सिन 2.5 मिग्रा प्लस ग्लिमेपिराइड, डेपाग्लिफ्लोक्सिन 5 मिग्रा प्लस ग्लिमेपिराइड, डेपाग्लिफ्लोक्सिन 10 मिग्रा प्लस ग्लिमेपिराइड या प्लेसबो प्लस ग्लिमेपिराइड
इस अध्ययन का प्रारंभिक निष्कर्ष 24 सप्ताह के दौरान एचबीए1सी में बेसलाइन से होने वाले बदलाव को परखना था प्रमुख सेकेंडरी एंडप्वाइंट में शरीर के वजन में बेसलाइन से बदलाव, ओरल ग्लूकोज टालरेंस टेस्ट : ओजीटीटी: में बदलाव, 24 हफ्ते के दौरान 7 प्रतिशत से कम एचबीए1सी पाने वाले मरीजों और इस अवधि के दौरान फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज : एफपीजी : लेवल में कमी का अनुपात शामिल किया गया
अध्ययन के नतीजे ग्लिमेपिराइड और डेपाग्लिफ्लोक्सिन लेने वाले मरीजों ने ग्लिमेपिराइड : उपचार की सभी शाखाओं के लिए पीवैल्यू 0.0001 से कम: और प्लेसबो के 0.13 प्रतिशत की तुलना में क्रमश: 2.5 मिग्रा, 5 मिग्रा और 10 मिग्रा की खुराक वाले डेपाग्लिफ्लोक्सिन के लिए -0.58 प्रतिशत, -0.63 प्रतिशत और -0.82 प्रतिशत के एचबीए1सी बेसलाइन से आश्चर्यजनक डोजडिपेंडेंट कमी हासिल की
ग्लिमेपिराइड तथा डेपाग्लिफ्लोक्सिन से उपचार कराने वाले मरीजों ने ग्लिमेपिराइड और प्लेसबो से इलाज कराने वाले मरीजों की तुलना में वजन में अधिकतम कमी हासिल की : 24 हफ्ते :डेपाग्लिफ्लोक्सिन क्रमश: 5 मिग्रा तथा 10 ग्राम के लिए 0.0001 से कम और 0.01 से कम पीवैल्यू, डेपाग्लिफ्लोसिन 2.5 मिग्रा का पीवैल्यू आंकड़ों के लिहाज से महत्वपूर्ण नहीं था: के दौरान ग्लिमेपिराइड प्लस प्लेसबो के लिए -0.72 क्रिग्रा की तुलना में डेपाग्लिफ्लोक्सिन के लिए क्रमश: -1.18 किग्रा, -1.56 किग्रा, -2.26 किग्रा
डेपाग्लिफ्लोक्सिन 2.5 मिग्रा से ओजीटीटी में 37.5 मिग्रा प्रति डीएल की कमी देखी गई
यह अध्ययन दर्शाता है कि डेपाग्लिफ्लोक्सिन प्लस ग्लिमेपिराइड लेने वाले मरीजों ने 24 हफ्तों के दौरान प्लेसबो प्लस ग्लिमेपिराइड लेने वालों की तुलना में 7 प्रतिशत से कम एचबीए1सी लेवल हासिल किया : डेपाग्लिफ्लोक्सिन 5 मिग्रा तथा 10मिग्रा को क्रमश: 30.3 प्रतिशत और 31.7 प्रतिशत के साथ ग्लिमेपिराइड प्लस प्लेसबो : डेपाग्लिफ्लोसिन 5 मिग्रा तथा 10 मिग्रा के लिए पीवैल्यू क्रमश: 0.01 से कम और 0.0001 से कम : के लिए 13.0 प्रतिशत की तुलना की गई जिन मरीजों का इलाज डेपाग्लिफ्लोक्सिन 2.5 मिग्रा से किया गया उनमें से 26.8 प्रतिशत मरीजों में एचबीए1सी 7 प्रतिशत से भी कम देखा
डेपाग्लिफ्लोक्सिन 5 मिग्रा तथा 10 मिग्रा प्लस ग्लिमेपिराइड से उपचार कराए जाने वाले मरीजों में 24 हफ्तों के दौरान बेसलाइन के आधार पर एफपीजी में आश्चर्यजनक सुधार देखा गया
प्लेसबो प्लस ग्लिमेपिराइड के लिए -2.0 मिग्राडीएल की तुलना में डेपाग्लिफ्लोक्सिन के लिए -21.2 मिग्राडीएल तथा डेपाग्लिफ्लोक्सिन 10 मिग्रा के लिए -28.5 मिग्राडीएल : उपचार की दोनों शाखाओं में पीवैल्यू 0.0001 से कम : डेपाग्लिफ्लोक्सिन 2.5 मिग्रा से एफपीजी में -16.8 मिग्राडीएल तक की कमी देखी गई
कई मरीजों में 24 सप्ताह के बाद प्रतिकूल स्थितियां ग्लिमेपिराइड प्लस प्लेसबो के लिए 47.3 प्रतिशत की तुलना में डेपाग्लिफ्लोक्सिन 2.5 मिग्रा, 5 मिग्रा और 10 मिग्रा के लिए क्रमश: 51.9 प्रतिशत, 48.3 प्रतिशत और 50.3 प्रतिशत देखी गईं जब ग्लिमेपिराइड में डेपाग्लिफ्लोक्सिन 2.5 मिग्रा, 5 मिग्रा तथा 10 मिग्रा और प्लेसबो को शामिल किया गया तो इसमें सर्वाधिक सामान्य प्रतिकूल स्थितियों का सामना करने वाले मरीजों का प्रतिशत इस प्रकार रहा : बैक पेन : 1.9 प्रतिशत, 2.1 प्रतिशत, 4.6 प्रतिशत बनाम 2.7 प्रतिशत :, अपर रेस्पायरेटरी ट्रैक्ट इनफेक्शन : 3.2 प्रतिशत, 4.1 प्रतिशत, 4.6 प्रतिशत बनाम 2.7 प्रतिशत : और ब्रानकाइटिस : 1.3 प्रतिशत, 2.1 प्रतिशत, 3.3 प्रतिशत बनाम 0.7 प्रतिशत :
प्रतिकूल स्थितियों के ज्यादातर मामले आंशिक से लेकर गंभीर तक के थे प्रतिकूल स्थितियों के कारण अनियमिततता डेपाग्लिफ्लोक्सिन 2.5 मिग्रा, 5 मिग्रा और 10 मिग्रा प्लस ग्लिमपेराइड बनाम ग्लिमपिराइड प्लस प्लेसबो के लिए 2.1 प्रतिशत के तहत 3.2 प्रतिशत, 3.4 प्रतिशत, 2.6 प्रतिशत देखी गई
यूरिनरी ट्रैक्ट इनफेक्शन तथा जेनेटिकल इनफेक्शन जैसी प्रतिकूल स्थितियों को इन दो श्रेणियों में से प्रत्येक के लिए पूर्व परिभाषित पसंदीदा शर्तों की ग्रुपिंग्स के आधार पर वर्गीकृत किया गया मरीजों के अंदर यूरिनरी ट्रैक्ट में संक्रमण के संकेतों, लक्षणों और अन्य रिपोटरें को सभी उपचार समूहों में समान देखा गया : ग्लिमेपिराइड प्लस प्लेसबो के 2.5 मिग्रा, 5 मिग्रा तथा 10 मिग्रा के लिए 6.2 प्रतिशत की तुलना में डेपाग्लिफ्लोक्सिन के लिए क्रमश: 3.9 प्रतिशत, 6.9 प्रतिशत और 5.3 प्रतिशत रहा इनमें से एक मरीज में यूरिनरी ट्रैक्ट संक्रमण होने के कारण दवा अनियमित कर दी गई
जेनेटिकल संक्रमण के संकेत, लक्षण और अन्य रिपोटरें में देखा गया कि ग्लिमेपिराइड प्लस प्लेसबो समूह की तुलना में डेपाग्लिफ्लोक्सिन 2.5 मिग्रा, 5 मिग्रा और 10 मिग्रा प्लस ग्लिमेपिराइड उपचार समूहों में अधिक पाया गया : यह संक्रमण क्रमश: 3.9 प्रतिशत, 6.2 प्रतिशत बनाम 0.7 प्रतिशत रहा
ग्लिमेपिराइड प्लस प्लेसबो के 4.8 प्रतिशत की तुलना में डेपाग्लिफ्लोक्सिन 2.5 मिग्रा, 5 मिग्रा तथा 10 मिग्रा प्लस ग्लिमेपिराइड के लिए गंभीर प्रतिकूल स्थितियों का असर क्रमश: 7.1 प्रतिशत, 6.9 प्रतिशत और 6.0 प्रतिशत रहा
जिन मरीजों का इलाज डेपाग्लिफ्लोक्सिन 2.5 मिग्रा, 5 मिग्रा और 10 मिग्रा प्लस ग्लिमेपिराइड के तहत 24 सप्ताह तक किया गया उनमें किसी तरह के हाइपोग्लिसेमिक घटना का प्रतिशत प्लेसबो प्लस ग्लिमेपिराइड से इलाज कराने वाले 4.8 प्रतिशत मरीजों की तुलना में क्रमश: 7.1 प्रतिशत, 6.9 प्रतिशत और 7.9 प्रतिशत रहा
ब्लड प्रेशर का प्रभाव एक्सप्लोरेटरी एंडप्वाइंट के तौर पर परखा गया
जब डेपाग्लिफ्लोक्सिन 2.5, 5 तथा 10 मिग्रा उपचार समूहों का इलाज किया गया तो उनके सीटेड सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर में बदलाव -4.7 एमएमएचजी, -4.0 एमएमएचजी तथा -5.0 एमएमएचजी तथा सीटेड डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर में बदलाव -1.1 एमएमएचजी, -1.7 एमएमएचजी तथा -2.8 रहा जबकि इसकी तुलना में प्लेसबो प्लस ग्लिमेपिराइड से इलाज कराने वाले उन मरीजों में सीटेड सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर का बदलाव क्रमश: -1.2 एमएमएचजी तथा सीटेड डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर -1.4 एमएमएचजी रहा
टाइप 2 डायबिटीज के बारे में टाइप 2 डायबिटीज : डायबिटीज मेलिटस : एक गंभीर, प्रोग्रेसिव बीमारी है जिसे पैनक्रियाज में बीटा सेल्स के डिसफंक्शन द्वारा पहचाना गया है और जिसमें इनसुलिन सेक्रेशन कम होने लगता है तथा एलिवेटेड ग्लूकोज लेवल बढ़ने लगता है समय के साथ इस स्थायी हाइपरग्लायसेमिया के कारण इनसुलिन प्रतिरोधन क्षमता बिगड़ने लगती है और इसके बाद बीटा सेल में भी गड़बड़ियां आने लगती हैं
टाइप 2 से पीड़ित कई मरीजों में मोटापा तथा हाइपरटेंशन जैसे कोमोर्बिडिटीज रोग पाए जाते हैं इसकी महत्वपूर्ण आवश्यक जरूरतें बनी हुई हैं क्योंकि इलाज कराए तकरीबन आधे मरीजों में उनके मौजूदा ग्लूकोज न्यूनता रेजिमेन का अनियंत्रण बना रहता है और बहुत कम मरीजों में ही कई तरह के मानदंड नियंत्रित पाए गए हैं पूर्व में टाइप 2 के होने वाले इलाजों में इनसुलिन आश्रित प्रबंधन पर प्रारंभिक रूप से फोकस रहता था इनसुलिन को स्वतंत्र रूप से सक्रिय करने वाली पहल टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित युवा मरीजों में उनका ग्लूकोज लेवल नियंत्रित करने में मदद के लिए उन्हें एक विकल्प प्रदान कर सकती है
एसजीएलटी2 इनहिबिशन के बारे में गुर्दा संबंधी एसजीएलटी सिस्टम शरीर में संपूर्ण ग्लूकोज संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाता है आम तौर पर प्रतिदिन किडनी तकरीबन 180 ग्राम ग्लूकोज को फिल्टर करती है और वास्तविक रूप से यह सभी संचरण में फिर से शोधित कर लिया जाता है
ग्लूकोज का पुनशरेधन एसजीएलटी सिस्टम के जरिये किडनी के प्रोक्सिमल ट्यूबल में होता है स्वतंत्र इनसुलिन प्रबंधन प्रक्रिया द्वारा एसजीएलटी2 का चुनिंदा इनहिबिशन पेशाब में ग्लूकोज और संबंधित कैलोरी का निष्कासन किया जाता है और इस प्रकार ब्लड ग्लूकोज लेवल कम हो जाता है
ब्रिस्टलमायर्स स्क्विब एवं एस्ट्राजेनेका की साझा पहल ब्रिस्टलमायर्स स्क्विब और एस्ट्राजेनेका ने कंपनियों को टाइप 2 डायबिटीज के लिए शोध, विकास एवं व्यावसायिक स्तर की चुनिंदा खोजपरक दवाएं बनाने में सक्षम बनाने की खातिर जनवरी 2007 में एक साझा कार्यक्रम शुरू किया ब्रिस्टलमायर्स स्क्विबएस्ट्राजेनेका डायबिटीज गठजोड़ वैश्विक स्तर पर टाइप 2 से पीड़ित मरीजों की देखभाल, मरीजों पर इसका असर सुधारने तथा उपचार के नए परिदृश्य पेश करने के लिए समर्पित है
ब्रिस्टलमायर्स स्क्विब के बारे में ब्रिस्टलमायर्स स्क्विब एक वैश्विक फार्मास्यूटिकल कंपनी है जिसका उद्देश्य उन दवाओं की खोज करना, विकसित करना तथा अत्याधुनिक दवाओं की आपूर्ति करना है जिससे गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों को मदद मिल सके


 

ब्रिस्टल मायर्स के बारे में अधिक जानकारी के लिए देखें एचटीटीपी : डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डाट बीएसमएस डाट काम या हमें ट्विटर पर देखें एचटीटीपी : ट्विटर डाट काम, बीएमएसन्यूज इस प्रेस विज्ञप्ति में ‘‘उम्मीदों पर आधारित बयान’’ हैं जिसके नियम उत्पाद विकास से संबंधित वर्ष 1995 के प्राइवेट सिक्योरिटीज लिटिगेशन रिफार्म एक्ट में वर्गीकृत किए गए हैं उम्मीदों पर आधारित इस तरह के बयान वर्तमान उम्मीदों पर आधारित हैं और इनमें स्वाभाविक जोखिम और अनिश्चितताएं मौजूद हैं इनमें वे तथ्य भी हैं जो इनमें से किसी में देरी, विपथन तथा बदलाव का कारण बन सकते हैं और वास्तविक परिणामों के साथ ही मौजूदा उम्मीदों की तुलना में मूल रूप से निष्कषरें और परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं उम्मीदों पर आधारित किसी बयान की गारंटी नहीं दी जा सकती है अन्य जोखिमों के अलावा इस बात की भी कोई गारंटी नहीं है कि डेपाग्लिफ्लोक्सिन नियामक मंजूरी हासिल कर लेगी या यदि इसे मंजूरी मिल भी जाती है तो व्यावसायिक स्तर पर यह एक सफल उत्पाद साबित होगा
इस प्रेस विज्ञप्ति में दिए गए उम्मीदों पर आधारित बयानों का मूल्यांकन कई अनिश्चितताओं के साथ किया जाना चाहिए जिससे ब्रिस्टलमायर्स स्क्विब का कारोबार प्रभावित होता हो, खासकर हमारी तिमाही रिपोर्ट में फार्म 10-क्यू पर तथा हमारी फार्म 8-के पर मौजूदा रिपोटरें में 31 दिसंबर 2009 की सालाना समाप्ति के तहत ब्रिस्टलमायर्स स्क्विब की सालाना रिपोर्ट में चेतावनी तथ्यों की चर्चा के दौरान पहचाना गया है ब्रिस्टलमायर्स स्क्विब उम्मीदों पर आधारित इनमें से किसी बयान को सार्वजनिक रूप से अपडेट करने का कोई दायित्व नहीं लेती है, चाहे इनमें नई जानकारी, भविष्य की घटनाएं या अन्य कोई बातें ही क्यों हो
एस्ट्राजेनेका के बारे में एस्ट्राजेनेका एक वैश्विक और नवीनतापरक बायोफार्मास्यूटिकल कारोबारी कंपनी है जिसका मुख्य फोकस प्रेस्क्रिप्शन दवाओं की खोज, विकास और व्यावसायीकरण पर केंद्रित है गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल, कार्डियोवैस्क्यूलर, न्यूरोसाइंस, रेस्पायरेटरी तथा इनफ्लेमेशन, ओन्कोलाजी तथा संक्रामक रोगों की दवाएं बनाने में यह एक अग्रणी कंपनी है
स्टाकहोम एस्ट्राजेनेका वर्ष 2009 में 32.8 अरब अमेरिकी डालर का वैश्विक राजस्व अर्जित कर चुकी है अधिक जानकारी के लिए कृपया देखें : एचटीटीपी : डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डाट एस्ट्राजेनेका डाट काम स्रोत : एस्ट्राजेनेका एंड ब्रिस्टलमायर्स स्क्विब पीआरन्यूजवायरएशियानेट : रंजन रंजन पीडब्ल्यूआर16 09211457 दि