ग्लोबल रिटेल थेफ्ट बैरोमीटर के अध्ययन में वैश्विक स्तर पर खुदरा बिक्री में 5.6 प्रतिशत से 1.36 प्रतिशत या 4,980 अरब रुपये : 107.3 अरब अमेरिकी डालर :

ग्लोबल रिटेल थेफ्ट बैरोमीटर के अध्ययन में वैश्विक स्तर पर खुदरा बिक्री में 5.6 प्रतिशत से 1.36 प्रतिशत या 4,980 अरब रुपये : 107.3 अरब अमेरिकी डालर :
 
23/11/2010 1:46:49:213PM
 
 

ग्लोबल रिटेल थेफ्ट बैरोमीटर के अध्ययन में वैश्विक स्तर पर खुदरा बिक्री में 5.6 प्रतिशत से 1.36 प्रतिशत या 4,980 अरब रुपये : 107.3 अरब अमेरिकी डालर : की कमी पाई गई है
मुंबई, 23 नवंबर 2010, पीआरन्यूजवायर- एशिया- एशियानेट ।
भारत में खुदरा बिक्री में कमी विश्व के सर्वोच्च स्तर 2.72 प्रतिशत पर पहुंचते हुए जारी है ।
रिटेल क्राइम से प्रति परिवार पर कुल चपत 6,631 रुपये लगते हुए कुल 92,959 रुपये की हानि हुई है ।
– एशिया प्रशांत क्षेत्र में नुकसान दर घटकर 6.5 प्रतिशत रहा लेकिन एशिया- प्रशांत और भारतीय रिटेलरों का तकरीबन एक चौथाई हिस्सा अभी भी उच्च हमले या वास्तविक चोरी झेल रहा है ।
– खाद्यान स्टोर्स में रखे इनफैंट फार्मूला तथा अल्कोहल या लिकर से सर्वाधिक नुकसान देखा गया है । फैशन-तैयार कपड़ों और एक्सेसरीज तथा शेविंग प्रोडक्ट्स, लिपस्टिक एवं शृंगार प्रसाधन जैसे हेल्थ एंड ब्यूटी उत्पाद एशिया प्रशांत क्षेत्र में दुकान से चोरी करने वालों के लिए पसंदीदा उत्पाद रहे हैं ।
ग्लोबल रिटेल थेफ्ट बैरोमीटर के चौथे सालाना संस्करण के मुताबिक, वर्ष 2010 में ग्लोबल रिटेल थेफ्ट से कुल 4,980 अरब रुपये : 107.3 अरब अमेरिकी डालर : का नुकसान सामने आया जो पूर्ववर्ती वर्ष : एशिया प्रशांत में 6.5 प्रतिशत : की तुलना में 5.6 प्रतिशत की कमी दर्शाता है । इस रिपोर्ट का सारांश इस वेबसाइट पर उपलब्ध है http://globalretailtheftbarometer.com/press/ .

    (Video: http://www.prnasia.com/sa/2010/10/20101019063608.flv )
    (Photo: http://www.prnasia.com/sa/2010/10/29/20101029590905.html )
    (Photo: http://www.prnasia.com/sa/2010/10/29/20101029499945.html )
    (Logo: http://www.prnasia.com/xprn/sa/200701241626.jpg )
 चेकप्वाइंट सिस्टम्स से मिले स्वतंत्र अनुदान द्वारा प्रायोजित इस अध्ययन से जुलाई 2009 तथा जून 2010 के बीच वैश्विक रिटेल उद्योग में होने वाली क्षति : दुकान से चोरी, कर्मचारियों के अपराध तथा प्रशासनिक त्रुटियों से होने वाला नुकसान : लागत पर नजर रखी गई और पाया गया कि सभी क्षेत्रों पर किए गए सर्वेक्षण के दौरान नुकसान में थोड़ी कमी आई है । नुकसान से सबसे ज्यादा कमी उत्तरी अमेरिका में आई । जिन ग्लोबल रिटलरों ने वर्ष 2010 के दौरान वास्तविक चोरी या दुकान से चोरी के प्रयास के मामलों में वृद्धि दर्ज कराई है उनका अनुपात 31.1 प्रतिशत : एशिया प्रशांत में 23.1 प्रतिशत : रहा ।
सेंटर फार रिटेल रिसर्च के निदेशक और इस अध्ययन के लेखक प्रोफेसर जोशुआ बामफील्ड ने कहा, ‘‘नुकसान में आई कमी के बावजूद सर्वे में शामिल किए गए 42 देशों और प्रांतों में प्रत्येक परिवार पर उनके शापिंग बिल पर अतिरिक्त 8,632 रुपये की औसत चपत रिटेल अपराध के कारण लगी है । भारत में यह चपत 6,631 रुपये : 143 अमेरिकी डालर : रही जो एशिया प्रशांत क्षेत्र में नुकसान से होने वाली औसत चपत 5430 रुपये : 117 अमेरिकी डालर : से थोड़ा ज्यादा रही ।
सुरक्षा खर्च में बढ़ोतरी तथा चोरी के मामलों में कमी के बीच परस्पर संबंध वर्ष 2010 का अध्ययन यह भी बताता है कि रिटेलरों ने नुकसान से बचाव और सुरक्षा के लिए अपना खर्च वर्ष 2009 की तुलना में वैश्विक स्तर पर 9.3 प्रतिशत यानी 1,244 अरब रुपये : 26.8 अरब अमेरिकी डालर : बढ़ाया है जबकि एशिया में नुकसान से बचाव पर खर्च राशि पिछले वर्ष की तुलना में 6.7 प्रतिशत बढ़ाई गई है ।
बामफील्ड ने कहा, ‘‘सुरक्षा खर्च में बढ़ोतरी तथा वैश्विक स्तर पर चोरी के मामलों में 5.6 प्रतिशत की कमी काफी महत्वपूर्ण रही । यह पहल नुकसान से बचाव कार्यक्रमों में निरंतर प्रगति तथा सुधार के महत्व को दर्शाती है जबकि चोरी के मामलों में कमी रिटेलरों कारोबार की सफलता और विकास के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है ।’’ चेकप्वाइंट सिस्टम्स के चेयरमैन, अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी राब वैन डर मर्वे ने कहा, ‘‘आर्थिक मंदी का दौर शुरू होने वाले वर्ष 2008 में नुकसान से बचाव पर होने वाले खर्च में कटौती को लेकर रिटेलरों का लालच बढ़ गया । इसी खास वजह से नुकसान में वृद्धि देखी गई और यही कारण हमने वर्ष 2009 के थेफ्ट बैरोमीटर अध्ययन में देखा था । रिटेलरों ने बहुत जल्द इस परंपरा को सुधारने की जरूरत महसूस की और छोटे-छोटे प्रतिष्ठानों पर निवेश करना शुरू कर दिया जिसे हाई-थेफ्ट मर्केंडाइज की सुरक्षा वृद्धि जैसे उच्च आरओआई के साथ बड़ी तेजी से लागू किया जा सकता है और उन्होंने कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर अधिक से अधिक जोर देते हुए स्टोर की आडिटिंग शुरू कर दी । इसका नतीजा बहुत कम समय के लिए सफल रहा और नुकसान में कमी आई ।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आर्थिक मंदी से हमने जैसे-जैसे उबरना शुरू किया, वैसे-वैसे हमारे लिए शायद यह उपयुक्त बनता गया कि हम ज्यादा समग्र तरीके से नुकसान पर काबू पा सकें और उन प्रौद्योगिकियों का विलय करने की कोशिश करने लगे जिन्हें रिटेलर भविष्य में भी जारी रख सकें । मिसाल के तौर पर उन्होंने सप्लाई चेन में बेहतर ट्रैकिंग तथा वस्तुओं की दृश्यता अतिरिक्त रूप से बढ़ाने के लिए ईएएस का अत्याधुनिक संस्करण तथा आरएफआईडी प्रौद्योगिकी को इसमें शामिल किया जिससे आउट आफ स्टाक का झंझट खत्म हो सकता है और बिक्री में वृद्धि हो सकती है ।’’ रिटेल में वैश्विक स्तर पर नुकसान दर अध्ययन अवधि के दौरान नुकसान की वजह से रिटेलरों की लागत 4,980 अरब रुपये : 107.3 अरब अमेरिकी डालर : देखी गई जो वैश्विक रिटेल बिक्री का 1.36 प्रतिशत रहा । यह पूर्ववर्ती वर्ष की तुलना में 1.43 प्रतिशत कम रहा । एक बार फिर भारत ऐसा देश बना जहां रिटेल बिक्री के प्रतिशत : 2.72 प्रतिशत : के तौर पर नुकसान का सर्वोच्च दर देखा गया, हालांकि इसने वर्ष 2009 की तुलना में 15 प्रतिशत की आश्चर्यजनक नुकसान कटौती का रिकार्ड भी दर्ज कराया है । नुकसान की न्यूनतम दर ताइवान : 0.87 प्रतिशत : पाई गई और इसके बाद यह दर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 1.16 प्रतिशत रही ।
नुकसान दर जिन वस्तुओं में बढ़ी संपूर्ण रूप से जहां नुकसान में कमी देखी गई वहीं सर्वाधिक चोरी होने वाली कुछ वस्तुओं से नुकसान मामले पिछले वर्ष बढ़े पाए गए जिनमें बच्चों के कपड़े, आउटरवियर, शेविंग प्रोडक्ट्स, लक्जरी कूक्ड मीट तथा इनफैंट फार्मूला शामिल हैं ।
ग्लोबल वर्टिकल मार्केट से नुकसान यह नुकसान कारोबार की प्रकृति, वर्र्टिकल मार्केट तथा देश के आधार पर अलग अलग रहा । वर्ष 2010 में नुकसान की सर्वोच्च औसत दर अपैरल-क्लोदिंग और फैशन-एक्सेसरीज : 1.72 प्रतिशत : और कास्मेटिक्स- परफ्यूम-ब्यूटी सप्लाई-फार्मेसी : 1.70 प्रतिशत : जैसी वस्तुओं में देखी गई ।
नुकसान की असली जड़ दुकान से सामान उठा लेना और संगठित रिटेल अपराध सहित ग्राहकों द्वारा चोरी किए जाने से ज्यादातर देशों में सर्वाधिक नुकसान देखा गया और यह नुकसान का 42.4 प्रतिशत रहा । इसके बाद कर्मचारियों द्वारा चोरी की घटनाओं के कारण रिटेलरों को 35.3 प्रतिशत का नुकसान हुआ ।
वान डेर मर्वे ने कहा, ‘‘हालांकि रिटेलरों ने नई एंटी-श्रिंकिंग नीतियां लागू करने में यथोचित प्रगति प्रदर्शित की है और रिटेल में सर्वाधिक चोरी होने वाले ‘टाप फिफ्टी’ उत्पादों में से 25 प्रतिशत से अधिक उत्पादों को अभी भी कोई विशेष सुरक्षा प्रदान नहीं की गई है । लिहाजा हमारे उद्योग को रिटेलरों तथा ग्राहकों की बेहतर सुरक्षा प्रदान करने में मदद के लिए नवीनता में तेजी लाने की जरूरत है ।’’ रिटेल नुकसान पर एशिया-प्रशांत तथा भारतीय के कुछ और मुख्य अंश शापलिफ्टिंग – भारतीय रिटेलरों ने शापलिफ्टिंग के कारण रिटेल नुकसान में 47.3 प्रतिशत की क्षति झेली है जिसकी कुल सालाना लागत 49,009 मिलियन रुपये : 1,056 मिलियन अमेरिकी डालर : रही ।
– अपैरल-क्लोदिंग में नुकसान की सर्वोच्च औसत दर 1.72 प्रतिशत रही ।
कर्मचारियों द्वारा चोरी रिटेल के नुकसान का दूसरा सबसे बड़ा कारण रहा कर्मचारियों द्वारा होने वाली चोरी, इससे 26.4 प्रतिशत का नुकसान उठाना पड़ा ।
सर्वे यूरोप में वर्ष 2001 में शुरू किया गया और वर्ष 2007 में वैश्विक स्तर पर फैलाया गया ग्लोबल रिटेल थेफ्ट बैरोमीटर : जीआरटीबी : एक सालाना सर्वेक्षण है जिसका संचालन ब्रिटेन के नाटिंघम स्थित सेंटर फार रिटेल रिसर्च द्वारा किया जाता है और इसका प्रायोजन चेकप्वाइंट सिस्टम्स द्वारा किया जाता है । यह अध्ययन रिटेल से चोरी तथा विश्व में अपराध पर किया जाने वाला सबसे बड़ा और सर्वाधिक समग्र सर्वेक्षण है । इस अध्ययन में अमेरिका, चीन, भारत, यूरोप, जापान और आस्ट्रेलिया सहित विश्व के 42 देशों और प्रांतों में रिटेल के नुकसान तथा अपराध के प्रमुख चलनों को शामिल किया जाता है । इस वर्ष पहली बार रूस को भी इस अध्ययन में शामिल किया गया है । यह रिपोर्ट 40,553 अरब रुपये : 873.8 अरब अमेरिकी डालर : की सामूहिक बिक्री के साथ 233,721 स्टोर्स के मालिक और सबसे बड़े 1,103 रिटेलरों से गोपनीय विवरण लेकर तैयार की गई है जिसमें क्रास-सेक्शन देशों तथा रिटेल वर्टिकल बाजारों का परस्पर मूल्यांकन शामिल किया गया है ।
सेंटर फार रिटेल रिसर्च के बारे में
ग्लोबल रिटेल थेफ्ट बैरोमीटर : यूरोप का दसवां संस्करण : का चौथा संस्करण सेंटर फार रिटेल रिसर्च  (http://www.retailresearch.org )  के निदेशक जोशुआ बामफील्ड द्वारा तैयार किया गया है जिसमें चेकप्वाइंट सिस्टम, इंक. का भी सहयोग लिया गया है । सीआरआर एक स्वतंत्र संगठन है जो रिटेल संबंधी धोखाधड़ी और अपराध पर केंद्रित तथा इसकी रिटेलिंग के बदलते रूपों के साथ रिटेल सेक्टर के लिए शोध एवं परामर्श प्रदान करता है । इसने दुकान से चोरी तथा दुनिया के कई हिस्सों में हो रही धोखाधड़ी पर काबू पाने के लिए अपराध के कारण होने वाले नुकसान और इलेक्ट्रानिक तथा कंप्यूटराइज्ड सिस्टमों को लागू करने के खर्च का लेखा-जोखा करने के लिए कई व्यापक अध्ययन किए हैं ।
चेकप्वाइंट सिस्टम्स, इंक. के बारे में चेकप्वाइंट सिस्टम्स नुकसान प्रबंधन, व्यापारिक वस्तुओं की दृष्टिगोचरता और अपैरल लेबलिंग समाधानों में वैश्विक अग्रणी कंपनी है । चेकप्वाइंट रिटेलरों तथा उनके आपूर्तिकर्ताओं को नुकसान में कमी लाने, स्वयं उपलब्धता तथा आपरेशनल उत्कृष्टता हासिल करने के लिए रियल-टाइम डाटा की स्थापना में सक्षम बनाती है । चेकप्वाइंट के समाधान 40 वषरें की आरएफ प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता, विविध प्रकार के नुकसान प्रबंधन की पेशकशों, अपैरल लेबलिंग समाधानों का वृहद पोर्टफोलियो, बाजार प्रमुख आरएफआईडी अनुप्रयोगों, नवीनतम हाई-थेफ्ट समाधान और इसके वेब आधारित चेक-नेट डाटा प्रबंधन प्लेटफार्म पर तैयार किए गए हैं । नतीजतन चेकप्वाइंट के ग्राहक सप्लाई-चेन की कुशलता में सुधार लाते हुए बिक्री और लाभ में बढ़ोतरी का लुत्फ उठाते हैं, ये सुविधाएं आन-डिमांड लेबल प्रिंटिंग के आधार पर प्रदान की जाती हैं और ग्राहकों के शापिंग अनुभव को बढ़ाते हुए एक सुनिश्चित ओपन-मर्कर्ेेंडाइजिंग माहौल के जरिये प्रदान की जाती हैं । एनवाईएसई : एनवाईएसई, सीकेपी : पर सूचीबद्ध चेकप्वाइंट प्रत्येक बड़े भौगोलिक बाजार में संचालन करती है और इसमें वैश्विक स्तर पर कर्मचारियों की संख्या 5,700 है । अधिक जानकारी के लिए देखें  http://www.checkpointsystems.com
 संपर्क : नताली चान चेकप्वाइंट सिस्टम्स, इंक. टेलीफोन : 852 2995 8350 ईमेल : नताली डाट चान एट चेकपीटी डाट काम स्रोत : चेकप्वाइंट सिस्टम्स, इंक. पीआरन्यूजवायर- एशिया- एशियानेट : रंजन रंजन पीडब्ल्यूआर3 11231237 दि