वैश्विक स्तर पर पोलियो उन्मूलन के लिए पहल पर अनुमानित आर्थिक लाभ 40 से 50 बिलियन अमेरिकी डालर

 42293 ग्लोबल पोलियो
श्रेणी: Medical and Health Care
 
वैश्विक स्तर पर पोलियो उन्मूलन के लिए पहल पर अनुमानित आर्थिक लाभ 40 से 50 बिलियन अमेरिकी डालर
 
24/11/2010 10:51:36:833AM
 
 पीआर नंबर- 42293बास्टन, 22.नवम्बर,2010:पीआरन्यूजवायर-एशियानेट:- वैक्सिन पर किया गया नया अध्ययन पोलियो को खत्म करने के लिए मजबूत आर्थिक औचित्य प्रदान करता है आज ही जारी हुआ नया अध्ययन वैश्विक स्तर पर पोलियो उन्मूलन के लिए किये जा रहे पहल पर शुद्ध आर्थिक लाभ अनुमानत 40 से 50 बिलियन अमेरिकी डालर का दे सकता है, अगर वाइल्ड पोलियोवायरस के फैलाव को अगले पांच वर्ष में बाधित किया जा सके तो । यह अध्ययन ग्लोबल पोलियो इरेडिकेशन इनिशियेटिव :जीपीइआई:-एकमात्र सबसे बड़ी परियोजना जिसका दायित्व हेल्थ कम्युनिटी ने उठा रखा है, के पहले कठोर लाभ और कीमत से सम्बंधित मूल्यांकन उपलब्ध कराता है । यह अध्ययन अति महत्वपूर्ण समय में सामने आया है- जब इसी साल इसका प्रकोप कांगो और तजाकिस्तान में एक के बाद एक कर सामने आया है-जो पोलियो को लेकर चल रहे काम के खत्म में हो रही देरी को दर्शाता है ।
वैक्सिन जर्नल में प्रकाशित, अध्ययन,‘‘इकोनामिक एनालिसिस आफ द ग्लोबल इरेडिकेशन इनिशिएटिव’’, जीपीईआई में 1988 में इसकी स्थापना के वक्त से ही किये गये निवेश को और उनको जो, 2035 से प्रत्याशित हैं को ध्यान में रखे है । इस गुजरे वक्त के दौरान, जीपीईआई के प्रयास बच्चों में होने वाले पेरालिटिक पोलियो के 8 मिलियन मामलों से बचायेगा । फलस्वरूप यह ईलाज पर होने वाले खर्चे में से कई बिलियन डालर की बचत करायेगा और इससे उत्पादकता में वृद्धि होगी।
अध्ययन ने यह भी बताया कि ‘‘एड-आन’’जीपीईआई प्रयास हेल्थ बेनिफिटस को सुधारेंगे और नियत समय सीमा में ही ज्यादा आर्थिक लाभ दिलायेंगे । विशेष रूप से, अनुमान है कि यह विटामिन ए सप्लीमेंटस की आपूर्ति कर अतिरिक्त 17-90 बिलियन डालर का लाभ लाइफ सेविंग प्रभाव देगा, जिसे जीपीईआई ने पोलियो वैक्सिन के साथ सप्लाई किया है ।
किड रिस्क, इंक , और अध्ययन का नेतृत्व करने वाले डा. राडबाउन्ड डुइन्जर तेब्बन्स ने कहा,‘‘पोलियो उन्मूलन मानवता और आर्थिक दोनांे परिपेक्ष्य से एक अच्छा सौदा है, ’’‘‘जीपीईआई बच्चों में होने वाले विनाशकारी पक्षाघात और मौत को बचाता है और सार्थक वित्तीय लाभ को महसूस करने की अनुमति विकासशाील देशों और पूरे विश्व को देता है । ’’ अध्ययन के अनुसार, उन्मूलन में होने वाली देरी तक पहुंचना महंगा है, लेकिन इस देरी के साथ भी, जीपीईआई अनुमानित शुद्ध सकारात्मक आर्थिक लाभ को भी उत्पन्न कर रहा है ।
बिल एण्ड मेलिंडा गेटस फाउंडेशन के ग्लोबल हेल्थ प्रोग्राम के प्रेसिडेंट डा. ताची यमादा ने कहा,‘‘पोलियो उन्मूलन के लिए किया जा रहा निवेश आर्थिक और नैतिक तौर पर अनिवार्य है,’’‘‘यह अध्ययन, वैश्विक पोलियो उन्मूलन के लिए त्वरित फंडिंग के मामले को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करता है , और अध्ययन दुनिया में कहीं भी रह रहे बच्चे, चाहें वह अमीर हों या फिर गरीब, के लिए इस विनाशकारी बिमारी से बचाये जान को सुनिश्चित भी करता है । ’’ जीपीईआई ने 1988 से पोलियो के 99 प्रतिशत मामलों को कम कर दिया है और 1999 में टाइप 2 पोलियो वायरस का पूरी तरह से उन्मूलन कर दिया है । स्थानीय प्रसार अपेक्षाकृत छोटे क्षेत्रों जैसे अफगाानिस्तान, भारत, नाइजिरिया, और पाकिस्तान में और अंगोला और डीआरसी समेत कुछ देशों में इसका प्रसार दोबारा स्थापित होने के साथ ही अगले कुछ वषरें में टाइप 1 और 3 के प्रसार को पूरी तरह से खत्म करने के गंभीर प्रयास किये जा रहें हैं । जब तक उन्मूलन नहीं होता, तब तक दुनिया के सभी देशों पर वायरस के एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंचने का जोखिम है, जैसा कि इसका प्रकोप तजाकिस्तान और द रिपब्लिक आफ द कांगो में देखा गया । कांगो में हाल ही में हुये प्रकोप ने अक्टूबर से, एक्यूट फ्लेसिड पेरालिसिस:एएफपी:के 200 मामलों को उजागर किया , जिसमें अधिकतर 15 साल से अधिक के लोग प्रभावित हुये ।
अध्ययन के वरिष्ठ लेखक और किड रिस्क के डा. किम्बर्ली थाम्पसन ने कहा,‘‘इस तरह का अध्ययन लोगों को बढ़ती संख्या की रोकथाम के महत्व के बारे में मदद करता है, ’’ किसी भी विकसित देश में उन्मूलन के महत्व पर प्रश्न नहीं उठाया जाता है जहां सौभाग्य से पोलियो एक धुंधली हो रही स्मृति है, लेकिन थाम्पसन के अनुसार,‘‘बचाव की गतिविधियां जैसे कि टीकाकरण कई बार सराहा नहीं जाता है, क्योंकि उस बिमारी के मामलों को गिनना काफी मुश्किल है, जो होती ही नहीं । ’’ अध्ययन अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग और बच्चों के स्वास्थ्य और विकास के लिए होने वाले निवेश के सही मूल्य को उपलब्ध कराता है ।
अध्ययन में 104 देशों का परीक्षण किया गया जो जीपीईआई से प्रत्यक्ष रूप से लाभ पा रहे थे, जिसमें मुख्यत निम्न-आय वाले देश शामिल थे । कई उच्च-आय वाले देशों को जीपीईआई के शुरू होने से पहले ही वाइल्ड पोलियोवायरस से हटा दिया गया था । सो, अध्ययन में अनुमानित शुद्ध लाभ में विकसित देशों में एकत्रित पर्याप्त लाभ को शामिल नहीं किया गया ।
अध्ययन का नेतृत्व स्वतंत्र नान-प्राफिट संगठन किड रिस्क,इंक., ने किया, जिसे 2009 में हार्वड स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ में किडस रिस्क परियोजना के उत्तराधिकारी के रूप में शुरू किया गया था । रिसर्च के अन्य सहयोगियों में यूएस सेन्टर्स फार डिजिज कंट्रोल एण्ड प्रिवेंशन:सीडीसी:, डेल्फट यूनिवर्सिटी आफ टेक्नोलाजी और द ग्लोबल पोलियो इरेडिकेशन इनिशियेटिव शामिल रहे । सीडीसी ने कान्ट्रेक्ट के अन्तर्गत हावर्ड स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ के लिए समर्थन दिया ।
जीपीईआई पब्लिक-प्राइवेट पाटर्नरशिप है, जिसे राष्ट्रीय सरकारों द्वारा चलाया जाता है, जिसका नेतृत्व विश्व स्वास्थ्य संगठन, रोटरी इंटरनेशनल, सीडीसी और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष:यूनीसेफ: करता है और इसे बिल एण्ड मेलिंडा गेटस फाउंडेशन समेत कई संगठनों से सहायता मिलती है ।
किड रिस्क, इंक के लिए लिंक  http://www.kidrisk.org/mainFrame/poliopub18.html
वैक्सिन के लिए लिंक http://www.sciencedirect.com/science/journal/0264410X
 स्रोत: किड रिस्क,इंक. सम्पर्क : किम्बर्ली थाम्पसन :1-617-680-2836
 kimt@kidrisk.org  या
राडबाउन्ड डुइन्जर तेब्बन्स
:1-857-383-4235 
rdt@kidrisk.org
 दोनों किड रिस्क, इंक के पीआरन्यूजवायर:एशियानेट