माक्र्वेट शोधकर्ताओं ने अंतर्राष्ट्रीय ‘टेक्सिक्वेट’ के बारे में अध्ययन को प्रकाशित किया ।

स्रोत: माक्र्वेट यूनिवर्सिटी पीआर नंबर-42513
श्रेणी: General
 
 
 
11/12/2010 12:47:37:823PM
 
मिल्वौकी, 9 दिसंबर, 2010 पीआर न्यूजवायरएशियानेट
प्रोफेसर सूतार, चटोपाध्याय ने अमेरीका और भारत में संदेश प्रेषण की आदतों का परीक्षण किया।
माक्र्वेट यूनिवर्सिटी में कम्यूनिकेशन के प्रोफेसरों को पाया कि भारत और संयुक्त राज्य के कालेज जाने वाले छात्रों में संदेशप्रेषण की आदत में अंतव्र्यक्ति मानक उभर रहे हैं और वे मानदंडों में दोनों देशों के बीच उल्लेखनीय अंतर है
डिएडेरिच कालेज आफ कम्यूनिकेशन में संचारशास्त्र के प्रोफेसर राबर्ट सूतार ::http://www.marquette.edu/comm/grad/shuter.shtml ने संदेशप्रेषण की आदतों के इस अध्ययन का नेतृत्व किया जिसेटेक्सिक्वेट’ कहा गया है इस विषय पर अभी तक कोई अध्ययन नहीं हुआ है
अपनी तरह का यह पहला अध्ययन है जिसे हाल में ही जर्नल आफ इंटरकल्चरल कम्यूनिकेशन रीसर्च में प्रकाशित किया गया है और पिछले जून में सिंगापूर में आयोजित इंटरनेशनल कम्यूनिकेशन एसोसिएशन कंफ्रेंस में प्रस्तुत किया गया था इस अध्ययन ने अमेरीकी और भारतीय पुरुष और महिलाओं के कैसे, कब और किसके साथ संदेश भेजने के बुनियादी फर्क को उजागर किया है
अध्ययन इसे भी प्रदर्शित करता है कि इन भिन्न संस्कृतिक पृष्ठभूमि के लोगों के संदेश प्रेषण की आदत में कैसा फर्क है
सूतार के अनुसार, विश्वभर में मोबाइल तकनीकों की व्यापकता ने उपकरणों के उपर शोध संचालित करने की आवश्यकता उत्पन्न किया है जिसे मोटेतौर पर उपयोगशीलता के मसलों पर केन्द्रीत होना पडता है जिसमें योजना बनाना, अधिसंरचनाएं और सेल फोनों की पहुंच शामिल है
हालांकि श्री सूतार की दिलचस्पी विशेषरूप से संदेशप्रेषण में रही और यह अंतव्र्यक्ति संपकों को प्रभावित करता है, इसे जानने में रही
श्री सूतार ने कहा किमोबाइल तकनीकों के सामाजिक कार्यकलापों का परीक्षण करने के लिए कुछ छानबीन हुई है। और उन अध्ययनों में अधिकांश ने सेलफोन को बातचीत करने का माध्यम ही माना है, उनमें संदेशप्रेषण की ओर ध्यान नहीं दिया गया है ।’’ श्री सूतार और सहयोगी सूमना चटोपाध्याय (http://www.marquette.edu/comm/grad/chattopadhyay.shtml),  जो माक्र्वेट में ब्रॉडकास्ट और इलेक्ट्रोनिक संचार की सहायक प्राध्यापक हैं, ने 137 भागीदारों का अध्ययन किया जिन्होंने बहुविध प्रेषित आने वाले संदेशों का रिकार्ड किया, खासकर डिजायन टेक्स्ट लाग्स में
प्रत्येक लॉग में निम्नलिखित आयामों में सुरक्षित आंकडे संकलित हुए :- 1. प्रसंग जिसमें संदेश को प्रेषित,प्राप्त और पढा गया
2.
प्रत्येक भागीदार ने किन लोगों के साथ संपर्क किया और उनकी प्रतिक्रिया संदेश के मिलने ,भेजने और पढने के दौरान कैसी रही
3.
संदेश प्रेषण की आदत में कैसी चीजें शामिल रही
श्री सूतार ने कहा किपरिणामों ने मजबूती के साथ दो भिन्न सांस्कृतिक टेक्सिक्वैट को प्रकट किया हैअंतरव्यक्ति मानक जो संदेश प्रेषण को नियंत्रित करते हैंभारत और अमेरीका में अलग अलग ढंग से विकसित हो रहे हैं ’’ ‘‘उसके अलावा अध्ययन ने प्रदर्शित किया है कि संदेशप्रेषण और संस्कृति एकदूसरे से अन्योनाश्रित ढंग से संबंधित लगते हैं ।’’ प्रमुख निष्कर्ष :- अध्ययन के कुछ प्रमुख निष्कषरें में निम्नलिखित शामिल हैं
अमेरीकीपुरुष और महिलाएं दोनोंअल्पाहारगृहों,दूकानों और सिनेमाघरों जैसे सार्वजनिक स्थलों से संदेश भेजने और पढने में भारतीय पुरुषों और महिलाओं की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक परांगत हैं। इसके विपरीत भारतीय पुरुष और महिलाएं अध्र्द निजी स्थलों जैसेअपने अपार्टमेंट या दोस्त के अपार्टमेंट से संदेश भेजना और पढना चाहते हैं
अमेरीकी लोग भारतीय लोगों की तुलना में विभिन्न प्रकार के अस5यतापूर्ण संदेशों को भेजने के 5यस्त हैं उन्हें अधिक अस5 संदेश प्राप्त होते हैं क्लासरुम,सिनेमाघरों से और भोजन करने के दौरान संदेश भेजने और संदेश प्राप्त करने की उंची आवाज में सूचनाएं प्राप्त करते हैं जबकि भारतीय लोगों ने अमेरीकी लोगों की तुलना में अस5यता पूर्ण संदेश भेजने और प्राप्त होने पर शर्म आने की सूचना दी
भारतीय लोग संदेश भेजने और पढने में वह समय चुनते हैं जब अपने परिजनों या पुरुष मित्र या महिला मित्र के साथ हों अमेरीकी लोग तब संदेश भेजना और पढना चाहते हैं जब अपरिचित लोगों या ऐसे दोस्तों के साथ हों जो परिवार के व्यक्ति जैसा नहीं है
समूचे अध्ययन की प्रति प्राप्त करने या श्री सूतार से बातचीत करने के लिए कफपया क्रिस्टोफर स्टोलास्र्की से मार्केटिंग और कम्यूनिकेशन कार्यालय में संपर्क करें उनका फोन नंबर-:414: 288-1988 और ईमेलक्रिस्टोफर डाट स्टोलास्की :एैट: माक्वेट डाट एडू है

एशियानेट : अमरनाथ

 
संपर्क:
क्रिस्टोफर स्टोलास्र्की 1-414-288-1988 क्रिस्टोफर डाट स्टोलास्र्की :एैट: माक्र्वेट डाट एडू