बौध्द नेता ने परमाणु हथियारों के उन्मूलन कर दिशा में प्रगति करने और वैश्विक मानवाधिकार संस्कृति के निर्माण का आहवान किया ।

स्रोत: Soka Gakkai International-43016
श्रेणी: General
 
 
 
29/01/2011 10:57:32:540AM
 
टोक्यो, 26 जनवरी क्योदो जेबीएनएशियानेट
सोकागाकी इंटरनेशनल :एसजीआई: अध्यक्ष दाईसाकु इकेदा ने 26 जनवरी को जारी प्रस्ताव ‘‘सबके लिए सम्मानजन विश्व की ओर:सृजनात्मक जीवन का विजयोल्लास’’ में वैश्विक नागरिक समाज से वर्तमान समय की दो प्रमुख चुनौतियों का समाधान करने के लिए पहल करने का आहवान किया है जो परमाणु हथियारों का निमरुलन और मानवाधिकारों की वैश्विक संस्कृति हैं
हालांकि दोनों मसले आकार और जटिलता में भयभीत करते हैं, मगर श्री इकेदा को एक बौध्द के रूप में प्रकट रूप से अलंघनीय चुनौतियों का सामना करने और उससे उबरने की मानवीय क्षमता पर विश्वास है
परमाणु उन्मुलन के संदर्भ में उन्होंने उन कार्रवाईयों का खाका तैयार किया है जिसे वैश्विक समुदाय आरंभ कर सकता है वे हैं :- 1. ऐसी संरचना की स्थापना करना जिसके भीतर परमाणु हथियार रखने वाले देश तेजी से निरस्त्रीकरण की ओर गतिशील होंेगे
2.
परमाणु हथियारों के विकास या आधुनिकीकरण पर पूर्व पाबंदी लगाना और 3. इन अमानवीय हथियारों पर परमाणु हथियार सम्मेलन :एनडब्लूसी: के माध्यम से समन्वित ढंग से गैरकानूनी घोषित करना
इस परिणाम को प्राप्त करने के लिए उन्होंने परमाणु निरस्त्रीकरण के बारे में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की नियमित बैठक आयोजित करने के संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान कीमून के आहवान का समर्थन किया
श्री इकेदा ने प्रस्ताव दिया है कि परमाणु हथियारों का त्याग कर देने वाले देश उन बैठकों के नियमित भागीदार होंगे और विशेषज्ञ तथा गैरसरकारी संगठनों के प्रतिनिधि भी उस सम्मेलन को संबोधित करेंगे उन्होंने सूझाव दिया कि हिरोशिमा और नागासाकी में 2015 परमाणु अप्रसारण संधि :एनपीटी: समीक्षा सम्मेलन आयोजित किया जाए और उसे परमाणु उन्मुलन सम्मेलन का रूप प्रदान किया जाना चाहिए
समन्वित परमाणु परीक्षण निरोधक संधि :सीटीबीटी: को शक्तिप्रदान करने के लिए श्री इकेदा ने दोपक्षीय, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय पहलकदमियों का आहवान किया जिसके माध्यम से अनेक देशों के समूह जैसे मिश्र,इजरायल और इरान आपसी समझदारी से संधि को स्वीकार कर सकेंगे इसतरह की व्यवस्था में छह पक्षीय बातचीत के माध्यम से उत्तरपूर्व एशिया को परमाणुविहिन बनाया जा सकेगा
श्री इकेदा ने एनडब्लूसी के प्रति अपने जोरदार समर्थन पर जोर दिया उन्होंने जोरदार ढंग से कहा कि वैसे सम्मेलन परंपरागत अंतर्राष्ट्रीय कानूनों में गुणात्मक बदलाव का प्रतिनिधित्व कर सकेगा जिसके अंतर्गत केवल सरकारों के बीच विचारविमर्श होती है उसके बदले एक ऐसा कानून बन सकेगा जो विश्व के लोगों की अभिव्यक्त इच्छाशक्ति से सर्वशक्तिमान होगा
मानवाधिकार की शिक्षा के बारे में श्री इकेदा ने कहा कि मानवाधिकारों को संधियों या कानूनों के माध्याम से स्थापित नहीं किया जा सकता बल्कि अन्याय को दुरुस्त करने के साधारण लोगों के प्रयास से किया जा सकता है जिस अन्याय का वे अनुभव करते हैं या अपनी आसपास की दुनिया में देखते हैं
इसका मतलब है किमानवाधिकार की संस्कृति’ का प्रमुख हिस्सा मानवाधिकार के प्रति स्वयं को और दूसरों संवेदनशील बनाना है
श्री इकेदा ने मानवाधिकार शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र केन्द्रीत प्रयासों के प्रति अपना समर्थन जताया और इस लिहाज से संयुक्त राष्ट्र प्रणाली की अंतर्गत नया परामर्शदात्री संगठन की स्थापना करने का प्रस्ताव दिया
उन्होंने मानवाधिकार शिक्षा और प्रशिक्षण के बारे में संयुक्त राष्ट्र की घोषणापत्र के महत्व पर जोर दिया जिसे वर्तमान में अंतिम रूप दिया जा रहा है तथा इस प्रक्रिया के समर्थन में एसजीआई की पहलकदमी का विवरण दिया जिसमें मानवाधिकार शिक्षा के लिए डीवीडी और अन्य औजारों का विकास करना शामिल है
उन्होंने विश्व के सभी धर्मों से मानवाधिकार शिक्षा को प्रोत्साहन देने के लिए अंतरधर्मिक वार्तालापों को आरंभ करने का आहवान किया
श्री दाइसाकु इकेदा सोका गाकी इंटरनेशनल :एसजीआई: बौध्द संघ के अध्यक्ष है जिसके विश्वभर में फैले एक करोड 20 लाख सदस्य शांति, संस्कृति और शिक्षा को प्रोत्साहन देने के लिए प्रतिबध्द हैं वे एसजीआई की स्थापना दिवस के अवसर पर 1983 से ही प्रति वर्ष 26 जनवरी को वाषिर्क शांति प्रस्ताव जारी करते हैं जिसमें वैश्विक मसलों के समाधान के लिए बौध्द मानवतावाद के दर्शन पर आधारित ठोस सुझाव होते हैं
स्रोत :- सोका गाकी इंटरनेशनल
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