आरएमआईटी ने भारत में संयुक्त शोध केन्द्र खोला

स्रोत: RMIT University, Australia -43157
श्रेणी: General
 
 
 
08/02/2011 12:50:13:143PM
 
  हैदराबाद, भारत 8 फरवरी मेडियानेट इंटरनेशनलएशियानेट
रसयानशास्त्र के अंतर्राष्ट्रीय वर्ष के अवसर पर आरएमआईटी यूनिवर्सिटी ने आज भारतीय प्रद्योगिकी संस्थान के साथ मिलकर भारत के हैदराबाद में संयुक्त शोध केन्द्र की स्थापना की
आरएमआईटी यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष और उपकूलपति प्रोफेसर मार्गेरेट गार्डनर एओ ने कहा कि आईआईसीटीआरएमआईटी संयुक्त शोध केंन्द्र रसायनिक शोध के क्षेत्र में भारत और आस्ट्रेलिया के बीच अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और साझीदारी का चमकता उदाहरण है
प्रोफेसर गार्डनर ने कहा कि ‘‘रसायनशास्त्र हमारी जीवन पध्दति के टिकाउपन और उन्नयन के लिए अनिवार्य सृजनात्मक विज्ञान है तथा रसायन के क्षेत्र में शोध हमारी सर्वाधिक अरुचिकर वैश्विक समस्याओं के समाधान करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है जिसमें भोजन, पानी, स्वास्थ्य और उर्जा शामिल हंै ।’’ यह केन्द्र पर्यावरणीय और औद्योगिक शोध पर ध्यान केन्द्रीत करेगा और यह भारत में आरएमआईटी का पहला साझीदारीयुक्त उपस्थिति है
आरएमआईटी संयुक्त केन्द्र के लिए चार लाख आस्ट्रेलियाई डालर से अधिक का योगदान करने के लिए वचनबध्द है और वह पहले ही इसकी स्थापना करने और छात्रों को अध्ययनवृत्ति देने के लिए डेढ लाख आस्ट्रेलियाई डालर योगदान कर चुका है
आईआईसीटी हैदराबाद में स्थित भारत का एक अग्रणी संस्थान है जिसके पास रसायनशास्त्र की विभिन्न शाखाओं में विशेषज्ञता है विशेषरूप से ऑर्गेनिक सिंथेसिस जिसमें प्राकृतिक उत्पाद, औषधीय रसायनशास्त्र, उत्प्रेरक और भौतिक फोटोकेमिस्ट्री शामिल है
आरएमआईटी और आईआईसीटी के शोधकर्ताओं ने अनेक परियोजनाओं पर पहले भी एकसाथ मिलकर काम किया है जिसमें नैनोअभियंत्रित सामग्रियों से संबिंधत मामले, प्रदूषित औद्योगिक वायु से पारा को हटाने और पर्यावरणीय ढंग से टिकाउ औद्योगिक प्रक्रियाओं की डिजायन करना शामिल है
नई संयुक्त सुविधा शोधकर्ताओं को जिन परियोजनाओं पर एकसाथ काम करने का अवसर देगा उनमें हरित रसायन के लिए उत्प्रेरकों की खोज, उन्नत सामग्री और पुर्नचक्रणीय उर्जा, जल गुणवत्ता की निगरानी की प्रक्रियाएं और गंदे जल का प्रसंशोधन, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन पर नियंत्रण और वायु प्रदुषण तथा जैवनैनोटेक्नोलाजी शामिल हैं
प्रोफेसर सुरेश भार्गवा जो संबंधित आरएमआईटी समूह के प्रमुख हैं, ने कहा कि आरएमआईटी और आईआईसीटी के बीच प्रारंभिक साझीदारी करीब तीन वर्ष पहले आरंभ हुई और बेहद सफल रही
उन्होंने कहा कि ‘‘इन दोनों शोध समूहों ने करीब 15 आलेखों का साझा तौर पर प्रकाशन किया और शोध विकास के सीमांत क्षेत्रों के बारे में जमीन नवोन्मेषपरक पेटेंटों को स्वतंत्र रूप से समर्पित किया ।’’ ‘‘हमारे शोध से भारत की गरीब आबादी को फायदा होगा और यह जलप्रसंशोधन तथा वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए किफायती तथा देशी समाधान और तकनीकें प्रदान करेगा जैसेएक तकनीक नैनोकंपोजिट क्लेय का उपयोग करके बर्तनों का निर्माण करने का है तो गंदे भूगर्भ जल का शुध्दिकरण करेगा और उसे पीने लायक सुरक्षित बनाएगा ’’ प्रोफेसर भार्गव ने कहा कि ‘‘संबंधित समूह की उत्कृष्ट वैज्ञानिक गुणवत्ता के माध्यम से इस संयुक्त उपक्रम से शोध पत्रों का प्रकाशन करने और नवोन्मेषपरक पेटेंटों को प्रस्तुत करने की अपेक्षा की जाती है जिनका वैश्विक मामलों पर मूल्यवान प्रभाव होगा। ’’ इंटरव्यू करने या टिप्पणी देने के लिए संपर्क :- प्रोफेसर सुरेश भार्गवा प्रमुख, एडवांस मेटेरियल्स एंड इंडस्ट्रियल केमिस्ट्री आरएमआईटी यूनिवर्सिटी 61-17-142-61 सामान्य मीडिया पूछताछ के लिए :- आरएमआईटी यूनिवर्सिटी कम्यूनिकेशंस देबोराह सिपिटस 61-3-925-116 या 61-29-88-69

स्रोत :- आरएमआईटी यूनिवर्सिटी , आस्ट्रेलिया