नये शोध ने बच्चों के आभासी उपस्थिति को शारीरिक के समान दर्शाया

स्रोत: 43635 Swinburne
श्रेणी: General
 
 
 
10/03/2011 10:20:05:320PM
 
नये शोध ने बच्चों के आभासी उपस्थिति को शारीरिक के समान दर्शाया
मेलबर्न, 9 मार्च,2011:पीआरन्यूजवायर-एशिया-एशियानेट:-
 भारत के उन अभिभावकों के लिए जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय बिजनेस ट्रिप पर रहना पड़ता है, के लिए कम्यूनिकेशन्स टूल महत्वपूर्ण पेरेन्टिंग एड हो सकते हैं ।
एक नये रिसर्च के मुताबिक जिसे स्वीनबर्न यूनिवर्सिटी आफ टेक्नोलाजी ने किया है, के अनुसार, जब शारीरिक रूप से मौजूदगी संभव न हो तो, विडियो कम्यूनिकेशन टूल्स जैसे कि स्काइपे के जरिए छोटे बच्चों से पारिवारिक सम्बंधों को बनाये रखा जा सकता है ।
वो अभिभावक और ग्रैण्डपेरेन्टस जो कि अपने छोटे बच्चों से अलग होते हैं कि फिक्र को कम करने के लिए, नये अध्ययन ने पता लगाया है कि छोटे बच्चों के लिए विडियो कनेक्शन शारीरिक उपस्थिति के समान ही लाभ प्रदान कर सकता है ।
जाआन तारासुइक, जो कि एक पीएचडी छात्र हैं और जो इस शोध में शमिल थे ने कहा, ‘‘हमने पाया कि वो बच्चे जो 17 महीने के थे और जो अपने अभिभावकों से शारीरिक तौर पर अलग हुये थे, को विडियो की उपस्थिति ने काफी आश्वस्त किया । ’’ ‘‘यह निष्कर्ष वर्तमान समाज में, जहां भौगोलिक कारणों से परिवार अलग होते हैं, के बीच संबंधों को बनाये रखने के लिए अच्छा है ।
‘‘इस तरह के अलगाव के दौरान, विडियो संपर्क छोटे बच्चों को अपने अभिभावकों के साथ भौगोलिक तौर पर अलग होने के बावजूद मनोवैज्ञानिक तौर पर दूरियों को कम करने में मदद करते हैं । ’’ अध्ययन 17 महीने से 5 साल के बीच के 41 बच्चों पर किया गया है जहां पर यह जानने कि कोशिश की गई कि अभिभावक से विडियो सम्पर्क के जरिए क्या उनके बीच निकटता और सुरक्षा की भावना आ पाई ।
हर बच्चे को अपने अभिभावकों के साथ स्वतंत्र प्ले सेशन दिया गया, जिसके बाद शारीरिक अलगाव: पुनर्मिलन का एपिसोड हुआ । शारीरिक अलगाव के एक एपिसोड के दौरान, भी अभिभावकों की ‘आभासी उपस्थिति’ विडियो लिंक के जरिए बच्चे से बनी रही ।
शोधकर्त्ताओं ने पाया कि बच्चों ने विडियो के माध्यम से अपने अभिभावकों से अन्तरक्रियाशीलता मामले में उतने ही स्तर का प्रदर्शन किया जैसा कि उनकी उपस्थिति में किया था ।
तारासुइक के सुपरवाइजर डा जार्डी काफमैन ने बताया, ‘‘बच्चे जिन्हें अभिभावकों की गैर मौजूदगी में अकेले एक कमरे में छोड़ा गया, जब न तो कोई विडियो सम्पर्क था और न ही शारीरिक रूप से उपस्थिति थी तब तुलनात्मक तौर पर अभिभावकों की आभासी उपस्थिति के दौरान भी वो लम्बे समय तक खेलते करते रहे । ’’ ‘‘विडियो अलगाव के अंत में, बेहद छोटे प्रतिभागियों को अपने अभिभावकों से शारीरिक सम्पर्क की आवश्यकता कम ही रही, यह भी उस सत्र के मुकाबले जहां वो लोग पूरी तरह अकेले छोड़े गये थे । ’’ अध्ययन लगभग वहां है : छोटे बच्चों के साथ किया गया विडियो सम्पर्क पीएलओएस वन में प्रकाशित है, अन्तरक्रियाशीलता वाला ओपन-एक्सेस जर्नल जिसे पब्लिक लाइब्रेरी आफ साइंस द्वारा साइंटिफिक एण्ड मेडिकल रिसर्च की सहकर्मी समीक्षा से कम्यूनिकेशन के लिए किया जाता है : http://www.plosone.org/article/info%3Adoi/10.1371/journal.pone.0017129

स्रोत:स्वीनबर्न यूनिवर्सिटी आफ टेक्नोलाजी पीआरन्यूजवायर:एशियानेट:किरण अमर पीडब्ल्यूआर2 03081308 दि