नोरोवायरस संक्रमण से हुए गंभीर गैस्ट्रोएंटेरेटिस के कारण बुखार को कम करने में लैक्टोबेसिलस बेवरीज के योगदान की पुष्टि हुई

स्रोत: Juntendo University Asianet 44526
श्रेणी: Medical and Health Care
 
 
 
11/05/2011 4:25:57:747PM
 
नोरोवायरस संक्रमण से हुए गंभीर गैस्ट्रोएंटेरेटिस के कारण बुखार को कम करने में लैक्टोबेसिलस बेवरीज के योगदान की पुष्टि हुई
टोक्यो, 10 मई, क्योदो जेबीएन- एशियानेट ।
– गैस्ट्रोएंटेरेटिस रेस्ट होम आउटब्रेक में व्यापक संक्रमण रोकने की उम्मीद जगी जुंटेंडो यूनिवर्सिटी के ग्रैजुएट स्कूल आफ मेडिसीन :नगाता संतोरू, यामाशिरो युचिरो एट अल : के प्रोबायोटिक्स रिसर्च के लेबोरेटरी विभाग में प्रोबायोटिक फर्मेंटेड दूध के सप्लीमेंटेशन का अध्ययन किया गया । एक नर्सिंग होम में रह रहे बुजुर्गों पर किए गए अध्ययन से पुष्टि हो गई कि कि इस दूध में पाया जाने वाला लैक्टोबेसिलस केसी स्ट्रेन शिरोटा : एलसीएस : गंभीर रूप से नोरोवायरस गैस्ट्रोएंटेरेटिस से पीड़ित मरीजों का ज्वर कम करने में मदद मिलती है ।
फेकल फ्लोरा के विश्लेषण ने प्रदर्शित किया कि रोजाना एलसीएस-फर्मेंटेड दूध का सेवन उपयोगी बैक्टीरिया : बायफिडोबैक्टीरिया, लैक्टोबेसिलस : को बढ़ाता है जबकि हानिकारक बैक्टीरिया : कोलिफोर्म ग्रुप : को कम करता है तथा वसायुक्त एसिड की छोटी शृंखला में वृद्धि करता है, जिससे यह निष्कर्ष निकलता है कि परिशोधित इंटेस्टिनल फ्लोरा और पर्यावरण गैस्ट्रोएंटेरिटिस के लक्षण को खत्म करने में अहम योगदान करते हैं ।
नोरोवायरस को गंभीर संक्रामक गैस्ट्रोएंटेरिटिस का मुख्य कारण माना जाता है जो कंपकंपी के दौरान खासकर बुजुर्गों में कभी-कभार बढ़ भी सकता है और डिहाइड्रेशन बढ़ने के खतरे के साथ ही इम्युन सिस्टम पर भी इसका असर पड़ सकता है । हाल के दिनों में अलग-अलग स्वास्थ्य केंद्रों पर बुजुर्गों में इस तरह का व्यापक संक्रमण देखा गया है । इस तरह के संक्रमण को रोकना एक चुनौती बन गई है ।
लैक्टोबेसिलस जैसे प्रोबायोटिक्स के प्रभाव से संबंधित कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है और जहां तक हम जानते हैं, न ही नोरोवायरस पर कोई तैयार रिपोर्ट उपलब्ध है ।
हमारे निष्कर्ष संकेत देते हैं कि प्रोबायोटिक सप्लीमेंटेशन संक्रामक गैस्ट्रोएंटेरिटिस से बचाव के प्रभावशाली उपाय के तौर पर दिया जा सकता है जिनमें उन केंद्रों पर नोरोवायरस से पीड़ित मरीजों को भी यह सुविधा दिया जाना शामिल है जहां सामूहिक रूप से रहने वाले और कंप्राइज इम्युन सिस्टम से पीड़ित बुजुर्ग मरीज भी शामिल हैं ।
ये निष्कर्ष 27 अप्रैल 2011 को वैज्ञानिक पत्रिका ब्रिटिश जर्नल आफ न्यूट्रिशन के आनलाइन संस्करण में प्रकाशित किए गए थे ।
1. पृष्ठभूमि नोरोवायरस को गंभीर संक्रामक गैस्ट्रोएंटेरिटिस के सबसे बड़े कारण के तौर पर जाना जाता है । नोरोवायरस संक्रमण अंगुलियों और प्रदूषित भोजन के जरिये मुंह से हस्तांतरण होता है और इस वजह से उल्टी, डायरिया और या पेट का दर्द होने लगता है जब यह संक्रमण आंत तक पहुंच जाता है । स्वस्थ व्यक्तियों में तेजी से सुधार के बाद तो यह संक्रमण मंद पड़ सकता है लेकिन शिशुओं या बुजुर्गों में यह संक्रमण गंभीर हो जाता है और उनके इम्युन सिस्टम पर गहरा असर करता है तथा इस वजह से न्यूमोनिया की शिकायत और फिर उल्टी या गंभीर डिहाइड्रेशन के बाद उनकी मौत तक हो जाती है । नर्सिंग होमों में विशेष रूप से जब कंप्रोमाइज्ड इम्युन सिस्टम से पीड़ित बुजुर्ग एक साथ रहते हैं तो उनमें संक्रामक रोगों का खतरा गंभीर हो जाता है । हालांकि संक्रमण पर पूरी तरह काबू पाना बेहद कठिन होता है और इस प्रकार इस संक्रमण से होने वाले नुकसान को कम करना ही बड़ी चुनौती बन जाती है ।
हमारे शोध समूह ने लेक्टोबेसिलस : लेक्टोबेसिलस सेसी स्ट्रेन शिरोटा, एलसीएस : के सेवन के संदर्भ में नोरोवायरस संक्रमण की रोकथाम के प्रभाव पर अध्ययन किया जिसे संक्रमण के खिलाफ बचाव के तौर पर जाना गया और जिसमें इम्युन-रेगुलेटरी विशेषताएं हैं ।
2. अध्ययन का ब्योरा यह अध्ययन एक नर्सिंग होम में रहने वाले 77 बुजुर्गों : जिनकी औसत आयु 84 साल थी : पर किया गया । अध्ययन का विषय दो समूहों में बांटा गया : एक इनटेक-ग्रुप :39: था जबकि दूसरा नान-इनटेक ग्रुप :38: था । इनटेक ग्रुप को अक्तूबर 2006 की शुरुआत से लंबे समय तक रोजाना एक एलसीएस फर्मेंटेड दूध दिया गया : 40 अरब एलसीएस के साथ 80 एमएल की एक बोतल : । रोजाना स्वास्थ्य रिकार्ड के आधार पर दोनों समूहों की स्वास्थ्य स्थिति परखी गई और इनमें यदि किसी में डायरिया की शिकायत पाई गई तो उनके शौच का नमूना जुटाकर नोरोवायरस डिटेक्शन किट के जरिये जांचा गया । कई मरीजों में दिसंबर 2006 से नोरोवायरस गैस्ट्रोएंटेरिटिस के लक्षण पाए गए । हालांकि संक्रमण की घटना का अंतर दोनों समूहों के बीच महत्वपूर्ण रूप से नहीं परखा जा सका लेकिन 37 से या इससे अधिक तापमान के बुखार का अंतराल इनटेक ग्रुप में नान-इनटेक ग्रुप की तुलना में कम पाया गया ।
इसी नर्सिंग होम में रहने वाले व्यक्तियों : औसत आयु 83 वर्ष : को उसी तरह का एलसीएस फर्मेंटेड दूध दो महीने तक रोजाना दिया गया और फिर प्री-इनटेक स्तर की तुलना में उनके मल के परीक्षण की तुलना की गई । नतीजे बताते हैं कि एलसीएस फर्मेंटेड दूध लेने वाले मरीजों में बायफिडोबैक्टीरिया और लेक्टोबैसिलस बढ़ा हुआ पाया गया । दूसरी तरफ हानिकारक कोलिफार्म बैक्टीरिया कम हुआ और स्यूडोमोनस की डिटेक्शन दर, जिस वजह से अवसरवादी तथा या नोसोकोमियल संक्रमण हो सकता है, वह भी कम पाई गई । इसके अलावा एलसीएस फर्मेंटेड दूध लेने वाले मरीजों के मल में शार्ट-चेन फैटी एसिड : एससीएफए: की संपूर्ण मात्रा भी बढ़ी पाई गई ।
3. चर्चा और भविष्य की उम्मीदें यह अध्ययन दर्शाता है कि एलसीएस फर्मेंटेड दूध का सेवन नोरोवायरस संक्रमण से होने वाले बुखार को कम करने में प्रभावशाली होता है । एलसीएस फर्मेंटेड दूध बाफिडोबैक्टीरिया तथा लेक्टोबेसिलस भी बढ़ाता है और कोलिफार्म बैक्टीरिया तथा स्यूडोमोनस में कमी लाता है । इसके अलावा यह एससीएफए की मात्रा : प्राथमिक रूप एसिटिक एसिड : भी बढ़ाता है । आंत के एससीएफए कोलिफार्म ग्रुप जैसे पैथोजेनिक अंगों की वृद्धि को दबाते हैं, जल तथा इलेक्ट्रालाइट की ग्रहण क्षमता बढ़ाते हैं और आंत की पेरिस्टेलेसिस को भी बढ़ाते हैं तथा एंटेरोसाइट्स के लिए एक उर्जा स्रोत के तौर पर काम भी करते हैं । एलसीएस फर्मेंटेड दूध का लगातार सेवन प्राकृतिक कोशिका की मारक गतिविधि को भी कम करने में मददगार देखा गया है । इस प्रकार यह एलसीएस फर्मेंटेड दूध के सेवन के परिणामस्वरूप बुखार खत्म करने का मुख्य तत्व मेजबान बैक्टीरिया की रक्षात्मक प्रक्रिया को बढ़ाता है और यह परिशोधित इंटेस्टिनल फ्लोरा तथा इम्युनोमोडुलैरिटी फंक्शन के कारण ही होता है ।
इस अध्ययन का परिणाम दर्शाता है कि एलसीएस से नोरोवायरस संक्रमण, श्वसन तंत्र तथा स्वास्थ्य केंद्रों पर अन्य संक्रमणों सहित संक्रामक गैस्ट्रोएंटेरिटिस के खिलाफ सुरक्षा के एक प्रभावशाली साधन के तौर पर योगदान की उम्मीद की जा सकती है जहां कंप्रोमाइज्ड इन्युन सिस्टम से पीड़ित बुजुर्ग मरीजों को एक साथ रखा जाता है ।
स्रोत : जुंटेंडो यूनिवर्सिटी संपर्क : यिचिरो यमाशिरो प्रोबायोटिक्स रिसर्च लेबोरेटरी के नियुक्त प्रोफेसर जुंटेंडो यूनिवर्सिटी ग्रैजुएट स्कूल आफ मेडिसीन टेलीफोन : 81 3 5689 0082 ई-मेल : यमाशिरो एट जुंटेंडो डाट एसी डाट जेपी क्योदो जेबीएन- एशियानेट : रंजन रंजन पीडब्ल्यूआर1 05111031 दि