पोलारिस ने भारतीय रिजर्व बैंक में इंटलेक्ट कोर बैंकिग प्रणाली का कार्यान्वयन किया ।

स्रोत: Polaris Software Lab -44804
श्रेणी: High Technology
 
 
 
30/05/2011 12:14:31:460PM
 
 चेन्नई, भारत । 27 मई । पीआर न्यूजवायर – एशियानेट ।
बेहतरीन क्रियात्मक आच्छादन और भविष्य के लिए तैयार वास्तुकारी प्रतिदिन दस करोड सौदों को संपन्न करने की क्षमता के साथ ।
अग्रणी वैश्विक वित्तीय तकनीक कंपनी पोलारिस साफ्टवेयर :पीओएलएस डाट बीओ : ने आज घोषणा किया कि भारतीय रिजर्व बैंक :आरबीआई:ने समूचे बैंक में इंटलेक्ट :टीएम: कोर बैंकिंग प्रणाली :सीबीएस: का संस्थापन करने के लिए पोलारिस का चयन किया है ।
संस्थापन का सौदा 55 करोड अमेरीकी डालर का है जिसमें प्रणालीगत एकीकरण और दस वषरे के लिए साफ्टवेयर की देखभाल-मरम्मत की जिम्मेवारी शामिल है ।
भारत की केन्द्रीय बैंकिंग संस्थान आरबीआई अपने सभी कार्यालयों में केन्द्रीकृत कोर बैंकिंग समाधान को संस्थापित करना चाहता था जो सभी बैंकिंग और लेखा कार्यकलापों को समेटते हुए उसके वर्तमान और भविष्य में होने वाली आवश्यकताओं को पूरा कर सके जिसमें बैंक के लिए एक केन्द्रीकृत लेजर भी शामिल है ।
केंन्द्रीय बैंकों के लिए इंटलेक्ट सीबीएस आरबीआई को सभी क्षेत्रीय कार्यालयों के बीच क्रास क्रियाशीलता और निर्बाध स्वचालन तथा एकीकरण के साथ बैंकिंग कार्यकलापों का संचालन करने की सुविधा देगा जिससे बैंक को उच्च अनुमापनीयता और प्रदर्शन क्षमता के उच्चतम स्तर ओएलटीपी कार्यकलाप और इ्रओडी की तरह बैच कार्यसंचालन दोनों में प्रदान करेगा ।
बहुविध और विविध प्रणालियों के बीच एकीकरण आरबीआई जैसे बडे केन्द्रीय बैंकों का सामान्य परिदृश्य है और उसका सामना करने में यह इंटलेक्ट सीबीएस बेहद कौशलपूर्ण एकीकरण एवं इंटरफस मिडलवेयर प्रदान करेगा जिससे व्यापक आकार के हार्डवेयरों के साथ संचालित बडी संख्या में प्रणालियों, संचालन प्रणालियों और तकनीकों को संभाला जा सकेगा ।
सुरक्षा के लिहाज से इंटलेक्ट सीबीएस आरबीआई के आईटी माहौल के साथ निर्बाध रूप से एकीकृत हो सकेगा जिसका मतलब होगा कि इसका प्रक्रियागत प्रवाह और कार्यप्रवाह की आवश्यकताओं को सुचारू रूप से पूरा किया जा सकेगा।
यह समाधान भविष्य में आरबीआई को होने वाले नियामक और क्रियाशीलात्मक आवश्यकताओं को बाजार में पहुंचने के न्यूनतम समय में पूरा करेगा । यह अनूठा और अत्याधुनिक सुरक्षात्मक विशेषताएं भी प्रदान करेगा। जैसे- आंतरिक खाता संख्या, टेम्पर प्रूफ डाटाबेस, पीकेआई समर्थित आदान-प्रदान कार्यान्वयन और भंडारण, खाता संचालन में सुरक्षा जिसमें सकारात्मक भुगतान विशेषताएं, दस्तावेज प्रमाणीकरण और परीक्षण, दो तरफा प्राधिकृतकरण और ओटीपी प्रावधान शामिल हैं ।
इस सफल सौदे के बारे में पोलारिस साफ्टवेयर के अध्यक्ष और सीईओ अरुण जैन ने कहा कि ‘‘मैं प्रसन्नता है कि इंटलेक्ट की अगली पीढी की वास्तुकारी का कठोर मूल्यांकन करने के बाद आरबीआई ने पोलारिस का चयन किया है । यह 55 करोड डालर का सौदा पोलारिस के लिए अकेला सबसे बडा इंटलेक्ट विजय है ।
आरबीआई ने हमारे उपर जिस विश्वास का प्रदर्शन किया है, वह अतिशय अनुमापनीय और खुला एसओए तकनीक का निर्माण करने में हमारे निवेश को मान्यता प्रदान करता है । मैं इस सौदे को पोलारिस उत्पादन अभियंत्रण समूह और ऐसे उच्चप्रदर्शन क्षमता-युक्त प्रणाली का निर्माण करने में दिखी उनकी प्रतिबध्दता को समर्पित करता हूं।’’ अधिक जानकारियों के लिए कृपया संपर्क करें :- द्विपायन देब पोलारिस साफ्टवेयर टेली. 91-9962536442 ईमेल :- द्विपायन डाट डी :एैट: पोलारिस डाट सीओ डाट आईएन स्रोत :- पोलारिस साफ्टवेयर लैब