45 मिलियन भारतीय 1.25 डालर प्रतिदिन से उपर उठे

स्रोत: Microcredit Asianet 45899
श्रेणी: General
 
 
 
17/08/2011 11:00:28:000PM
 
45 मिलियन भारतीय 1.25 डालर प्रतिदिन से उपर उठे
वाशिंगटन, 17 अगस्त, 2011, पीआरन्यूजवायर- एशियानेट ।
अमेरिका स्थित एडवोकेसी ग्रुप रिजल्ट्स एजुकेशनल फंड के एक कार्यक्रम माइक्रोक्रेडिट शिखर सम्मेलन अभियान द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, माइक्रोफाइनेंस में शामिल लगभग 9 मिलियन भारतीय परिवारों ने – लगभग 45 मिलियन पारिवारिक सदस्यों सहित- 1990 से 2010 के बीच प्रतिदिन 1.25 डालर की सीमा को पार कर लिया है । यह अच्छी खबर उस समय आई है जब भारत और अन्य क्षेत्र बुरे दौर से गुजर रहे हैं । माइक्रोफाइनेंस संस्थाएं ऐसे ऋण प्रदान करती हैं जो 50 डालर से शुरू हो सकते हैं तथा ऐसी वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराती है जिनसे गरीब छोटे व्यवसाय शुरू कर सकते हैं या बढ़ा सकते हैं ।
भारतीय विकास संस्थान : आईडीएफ : के शुभाषीश गंगोपाध्याय के नेतृत्व में और बप्पादित्य मुखोपाध्याय एवं सम्बित रथ द्वारा 15,000 से अधिक भारतीय परिवारों पर किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया है कि 1990 से 2010 के बीच बहुत से परिवार नाटकीय रूप से गरीबी से उबरे हैं । वास्तव में, 1998 से पहले भारत में माइक्रोफाइनेंस का क्षेत्र नाम मात्र को अस्तित्व में था । हालांकि, यह सर्वेक्षण आंध्र प्रदेश में 2010 के अंत में आए उस संकट से पहले काफी हद तक पूरा हो गया था जिसने बहुत बड़ी संख्या में माइक्रोफायनान्स की सेवा प्राप्त कर रहे परिवारों को इस सुविधा से वंचित कर दिया ।
माइक्रोक्रेडिट शिखर सम्मेलन अभियान के निदेशक सैम डेली-हेरिस ने कहा कि ‘‘यह रिपोर्ट अच्छी खबर है, जो ऐसे ही एक सर्वेक्षण के सात माह बाद मिली है जो बांग्लादेश में हो रही महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है । कोई भी सर्वेक्षण माइक्रोफाइनेंस को एक दुर्घटना के रूप में प्रचारित करने के लिए नहीं किया गया था, लेकिन भारत और बांग्लादेश में विशेष रूप से शुरुआती वषरें में माइक्रोफाइनेंस की मौजूदगी एवं दोनों ही देशों के ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी कम होने के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध रहा है । बांग्लादेश में सर्वेक्षण अवधि 1998 की भयंकर बाढ़ के कारण आई नाटकीय गिरावट से पहले गरीबी का महत्वपूर्ण रूप से कम होना दर्शाता है । भारत में ‘बाढ़’ का प्रभाव माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र में आए संकट को देखा जा सकता है, लेकिन वह संकट इन निष्कषरें में प्रतिबिंबित नहीं होता है ।’’ भारत में यह रिपोर्ट एसकेएस द्वारा 2010 में काफी सफल आरंभिक सार्वजनिक पेशकश : आईपीओ : के मद्देनजर आई है जिसके बाद इस देश में कुछ माइक्रोफाइनेंस व्यवहारों पर और आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा दमनकारी प्रतिक्रिया के गंभीर आरोप लगे थे ।
माइक्रोक्रेडिट रेटिंग्स इंटरनेशनल लिमिटेड : एम-सीआरआईएल : के प्रबंध निदेशक संजय सिन्हा के अनुसार, ‘‘एसकेएस ने माइक्रोफाइनेंस और कम आय वाले परिवारों को बहुत नुकसान पहुंचाया है । इसने अपनी इक्विटी के अंकित मूल्य का अविश्वसनीय रूप से सात गुना मूल्यांकन प्राप्त करते हुए लोगों को सपने बेचे : अति महत्वाकांक्षी विकास लक्ष्यों के रूप में : । इसके बाद कई बड़े माइक्रोफायनान्सांे ने एसकेएस विकास माडल की इसकी नकल की । साथ ही बहु ऋण व अति कर्जभार का अनुसरण किया गया, जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती थी ।
आईडीएफ के मुख्य अनुसंधानकर्ता शुभाषीश गंगोपाध्याय ने कहा, जबकि यह स्पष्ट है कि भारतीय माइक्रोफाइनेंस में परिवर्तनों की आवश्यकता है, यह महत्वपूर्ण है कि हम माइक्रोफाइनेंस की अच्छाइयों को अनदेखा नहीं करें । ग्रामीण समुदायों को ऐसी माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं से प्राप्त माइक्रोफाइनेंस सेवाओं तक पहुंच की आवश्यकता है जो अपने ग्राहकों को समझती हैं और उनके जीवन को बेहतर बनाने के लिए वचनबद्ध हैं ।’’ वैश्विक रूप माइक्रोफाइनेंस ने शैक्षिक समुदाय द्वारा आलोचनाओं का भी सामना किया है । यादृच्छिक नियंत्रण परीक्षणों : आरसीटी : की एक शृंखला ने गरीबी कम करने के उपकरण के रूप में माइक्रोफाइनेंस की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं । लेकिन इन प्रश्नों के जवाब अपनी कठोरताओं के लिए प्रचारित इन अध्ययनों में ही है । भुखमरी से आजादी : फ्रीडम फ्राम हंगर : के अध्यक्ष क्रिस डम्फोर्ड ने कहा है कि आरसीटी से मुझे दो समस्यायें है जिनका निवारण किया जा चुका है । वे समस्यायें हैं कि उनके पास गरीबी समाप्त करने की उनकी गहन वचनबद्धता के लिए अध्ययन कार्यक्रम नहीं हैं, और वे आमतौर पर वे अपने कार्यक्रम 12 से 18 माह की अवधि के लिये करते हैं, जो एक वास्तविक बदलाव होने के लिए बहुत कम समय है ।’’ ये दो सर्वेक्षण, भारत और मैक्सिको में आईपीओ, तथा आरसीटी ऐसे मुद्दे होंगे, जिन पर वेलाडोलिड, स्पेन में 14-17 नवम्बर को होने वाले वैश्विक माइक्रोक्रेडिट शिखर सम्मेलन में चर्चा की जाएगी । इन सर्वेक्षणों पर किया जा रहा काम, संयुक्त राष्ट्र सहस्राब्दि विकास के 2015 तक गरीबी को आधा करने के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु माइक्रोक्रेडिट शिखर सम्मेलन अभियान की वचनबद्धता का एक भाग है । रिपोर्ट का संक्षिप्त ब्योरा आनलाइन डाउनलोड करें :  

http://www.microcreditsummit.org/uploads/files/India_Report_FINAL.pdf

 

माइक्रोक्रेडिट शिखर सम्मेलन अभियान : माइक्रोक्रेडिट शिखर सम्मेलन अभियान अमेरिका स्थित एडवोकेसी ग्रुप रिजल्ट्स एजुकेशनल फंड की परियोजना है जो गरीबी समाप्त करने के लिए इच्छाशक्ति का निर्माण करने के लिए वचनबद्ध है । इस अभियान की शुरुआत 1997 में की गई थी और जिसने 2007 में स्व-रोजगार और अन्य वित्तीय एवं व्यावसायिक सेवाओं के लिए ऋण के साथ 100 मिलियन गरीब परिवारों तक पहुंचने के अपने मूल लक्ष्य को प्राप्त कर लिया । अगला वैश्विक माइक्रोक्रेडिट शिखर सम्मेलन 14-17 नवम्बर 2011 को वेलाडोलिड, स्पेन में होगा ।

http://www.microcreditsummit.org

 

भारतीय विकास संस्थान : आईडीएफ 2 अप्रैल 2003 को एक ट्रस्ट के रूप में स्थापित एक निजी वित्त पोषित, गैरलाभकारी, गैरसमर्थक रिसर्च फाउंडेशन है । इसका मुख्य उद्देश्य इस बारे में जागरूकता लाना है कि बाजार कैसे काम करते हैं, वे वांछनीय क्यों हैं और हम उन्हें विकसित कैसे कर सकते हैं । आईडीएफ का लक्ष्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं को बाजार-आधारित समितियों में बदलने में नीति निर्माताओं की सहायता करना है ।

http://www.idfresearch.org


स्रोत : माइक्रोक्रेडिट शिखर सम्मेलन अभियान
संपर्क करें : डालिया पालचिक, 1 303 748 6484, पालचिक एट माइक्रोसमिट डाट ओआरजी पीआरन्यूजवायर- एशियानेट : रंजन रंजन पीडब्ल्यूआर4 08171956 दि

http://www.microcreditsummit.org/uploads/files/India_Report_Summary_Sheet_ENG.doc

 

रिपोर्ट आनलाइन डाउनलोड करें