एसएडीएफ और गालअप ने दक्षिण एशिया पर किए गए पहले गहन सर्वेक्षण के नतीजे घोषित किए

स्रोत: SADF Asianet 46740
श्रेणी: General
 
 
 
12/10/2011 10:42:45:470PM
 
एसएडीएफ और गालअप ने दक्षिण एशिया पर किए गए पहले गहन सर्वेक्षण के नतीजे घोषित किए
 ब्रुसेल्स, 12 अक्तूबर, पीआरन्यूजवायर- एशियानेट ।
नेपालियों ने अपने देश की आर्थिक और राजनीतिक स्थितियों की बेहद निराशाजनक तस्वीर पेश की है- लेकिन मजबूत क्षेत्रीय सहयोग के लाभ से काफी उम्मीदें हैं ।
दक्षिण एशिया के देशों : अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका : के यूरोप के साथ बड़े रणनीतिक हित जुड़े हैं, दोनों महाद्वीप आर्थिक दृष्टिकोण के साथ-साथ सुरक्षा की दृष्टि से समानता लिए हुए हैं । भारत और पाकिस्तान के बीच हाल के तनावों ने पंडितों को दोनों देशों की सीमाओं को भविष्य में विश्व की सबसे खतरनाक जगह घोषित करने के लिए मजबूर कर दिया है । इसके साथ ही अफगानिस्तान और पाकिस्तान में संचालित आतंकवादी संगठन लगातार क्षेत्रीय तथा वैश्विक सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बने हुए हैं । इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए कि दक्षिण एशिया न सिर्फ तेजी से उभरते भारत का ठिकाना है बल्कि विश्व के सबसे कम विकसित चार देशों : अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान और नेपाल को भी समेटे हुए है । इस क्षेत्र में उपर वर्णित सुरक्षा समस्याओं के साथ-साथ इस तरह के प्रतिकूल आर्थिक हालात पर सिर्फ करीबी क्षेत्रीय सहयोग से ही पर्याप्त तरीके से काबू पाया जा सकता है ।
नेपाल में किए गए सर्वेक्षण से निकल हाल के नतीजे बताते हैं कि इस देश का जनमत अपेक्षाकृत ज्यादा क्षेत्रीय सहयोग का मजबूती से समर्थन करता है । 57 फीसदी नेपालियों के बहुमत ने दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन : सार्क : के बारे में सुनने की पुष्टि की है और सार्क को भलीभांति समझने वाले इनमें से 98 फीसदी नेपाली मानते हैं कि इस संगठन के साथ नेपाल की सदस्यता एक अच्छी चीज है ।
नेपालियों ने अपने देश :41 प्रतिशत ने आर्थिक स्थिति को खराब और 30 प्रतिशत ने सिर्फ ठीक-ठीक बताया : के मौजूदा आर्थिक हालात की बेहद निराशाजनक तस्वीर पेश की है । इसके लिए इनमें से ज्यादा नेपाली राजनीति नेतृत्व का अभाव और भट्राचार को जिम्मेदार ठहराते हैं । नेपालियों ने ठोस क्षेत्रीय एकजुटता के फायदों को लेकर काफी उम्मीदें पाल रखी है । मसलन, 86 फीसदी लोग सोचते हैं कि नेपाल में रोजगार के अधिक अवसर क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण संभावित फायदा होगा । हालांकि नेपाल के निवासी इस बात को जानते हैं कि दक्षिण एशिया में अधिक क्षेत्रीय सहयोग के बारे में सोचना एक कठिन काम है । भारत और पाकिस्तान के बीच हथियारों की होड़ और ऐतिहासिक दुश्मनी दक्षिण एशिया के देशों :क्रमश: 60 और 58 फीसदी लोग इसे बाधा मानते हैं : के बीच ठोस क्षेत्रीय सहयोग स्थापित करने में सबसे बड़ी बाधा मानी जा रही है और इस क्षेत्र की सुरक्षा के लिए आतंकवाद को सबसे बड़े खतरे के तौर पर देखते हैं । यूरोपीय संघ और इसके सदस्य देशों ने जब सार्क के बीच क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए नीतियां और कार्यक्रम पेश किए तो इस क्षेत्र को लेकर उनका नजरिया बेहद कमजोर था- नेपाल में प्रतिक्रिया देने वाले लोगों की सिर्फ आधी संख्या जर्मनी, फ्रांस या ब्रिटेन के बारे में कोई राय रखती थी जबकि दस में से चार लोग यूरोपीय संघ के बारे में जानते थे ।
नेपाल के ऐसे और अन्य प्रमुख निष्कर्ष आज एशिया में गालअप के क्षेत्रीय निदेशक निकोल नौरथ द्वारा गालअप के ब्रुसेल्स स्थित कार्यालय में पेश किए गए । यह सर्वे दक्षिण एशियाई परियोजना- दक्षिण एशिया डेमोक्रेटिक फोरम : एसएडीएफ: और गालअप के बीच सहयोग- का एक अंदरूनी हिस्सा है । यह दक्षिण एशिया में जनमत के जरिये आर्थिक विकास, लोकतंत्र की रक्षा एवं विवादों के निपटारे से लेकर आर्थिक तथा राजनीतिक सहयोग जैसे मुद्दों पर रायशुमारी करने का लक्ष्य रखती है । यह एसएडीएफ की एक महत्वाकांक्षा है जिसके तहत सार्क का गठन करने वाले दक्षिण एशियाई देशों के सात अन्य देशों : अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, पाकिस्तान और श्रीलंका में इसी तरह के सर्वेक्षण कराते हुए इस परियोजना को जारी रखा जाता है ताकि इन देशों में प्रगति और बदलाव की निगरानी के लिए अत्यावश्यक सूचक प्रदान किए जा सकें । संपर्क साउथ एशिया डेमोक्रेटिक फोरम स्क्वायर डी मीयस, 37 1000 ब्रुसेल्स बेल्जियम टेलीफोन 3227917525 इवेंट्स एट एसएडीएफ डाट ईयू

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स्रोत : साउथ एशिया डेमोक्रेटिक फोरम
पीआरन्यूजवायर- एशियानेट