जलवायु परिवर्तन की स्वीकार्यता और इसके शमन के लिए भारत-जर्मनी सहकारिता परियोजना भारतीय एमएसएमई की भूमिका अपनाएगी

स्रोत: Deutsche Asianet 47050
श्रेणी: General
 
 
 
01/11/2011 5:06:11:973PM
 
जलवायु परिवर्तन की स्वीकार्यता और इसके शमन के लिए भारत-जर्मनी सहकारिता परियोजना भारतीय एमएसएमई की भूमिका अपनाएगी
नई दिल्ली, भारत, 1 नवंबर, 2011, पीआरन्यूजवायर- एशियानेट ।
जर्मनी के आर्थिक सहयोग एवं विकास मंत्रालय की ओर से ड्यूश गेसेलस्काफ्ट फर इंटरनेशनल जुसामेनरबेइट : जीआईजेड : जीएमबीएच ने भारतीय एमएसएमई मंत्रालय के साझा सहयोग से एक परियोजना शुरू की है ताकि भारत के सूक्ष्म, छोटे तथा मंझोले उद्योगों : एमएसएमई : के लिए प्रतिस्पर्धी, नवोन्मेषण तथा व्यापारिक क्षमता पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को परखा जा सके ।
जीआईजेड हाल ही में शेयरधारकों की परामर्शक कार्यशाला का आयोजन कर इस प्रक्रिया की शुरुआत की है । सिविल सोसायटी, शिक्षाविदों तथा एमएसएमई के बीच चर्चा का मुख्य विषय इस सेक्टर में जलवायु परिवर्तन के खतरों पर विचार करना तथा जलवायु परिवर्तन स्वीकार्यता के जरिये नए व्यापारिक अवसरों की खोज एवं सृजन की भूमिका परखना है । आपसी सलाह से बने नजरिये को जलवायु परिवर्तन पर ई-लर्निंग कार्यक्रम की विकास प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा और इस मसले पर एमएसएमई के बीच बड़े पैमाने पर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से संबंधित व्यापारिक जोखिम एवं अवसरों का समकालीन शोध अध्ययन किया जाएगा ।
इस परियोजना के जरिये एमएसएमई पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के बारे में ज्ञान का अंतर पाटने की कोशिश की जा रही है और जलवायु परिवर्तन के शमन तथा अधिग्रहण के लिए रणनीतियों और इसके जरिये भारत सरकार के जलवायु परिवर्तन पर नेशनल एक्शन प्लान में सहयोग करना है । इससे नवोन्मेषक पद्धतियों की पहचान की जाएगी और उनका दस्तावेज तैयार किया जाएगा जिसके तहत एमएसएमई जलवायु परिवर्तन के प्रत्यक्ष एवं परोक्ष प्रभावों पर काम कर रहे हैं और अधिग्रहण तकनीकों की बाजार क्षमता को अपनाते हैं ।
भारत में जीआईजेड के प्राइवेट सेक्टर डेवलपमेंट विभाग के कार्यक्रम निदेशक मैनफ्रेड हेबिग ने कहा, ‘‘एमएसएमई भारतीय अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाते हैं और अपनी विशेषता के अनुकूल छोटी पहल करते हुए जलवायु परिवर्तन में महत्वपूर्ण योगदान कर सकते हैं ताकि नए उत्पादों एवं प्रक्रिया से संबंधित प्रयोग तेजी से अपनाई जा सके और अर्थव्यवस्था में निम्न कार्बन उत्सर्जन का सहयोग मिल सके ।’’ एमएसएमई स्वाभाविक रूप से छोटे होते हैं इसलिए अर्थव्यवस्था और श्रम बाजार में पूर्ण व्यवस्थित योगदान के अलावा वे भारत की उर्जा खपत तथा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में सामूहिक रूप से अहम योगदान कर सकते हैं । यह औद्योगिक सेक्टर उर्जा की खपत करने वाला दूसरा सबसे बड़ा सेक्टर है जिसमें एमएसएमई उत्पादन नतीजे का 45 प्रतिशत योगदान करते हैं ।
जीआईजेड के बारे में
एक संघीय उद्यम के रूप में जीआईजेड जर्मन सरकार को स्थिर विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में अपने उद्देश्य की प्राप्ति में सहयोग करता है । यह कंपनी पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय शिक्षा कार्य में भी सक्रिय है और वर्तमान में वैश्विक स्तर पर 130 से अधिक देशों में संचालित हो रही है । कृपया देखें : http://www.giz.de
 स्रोत : ड्यूश गेसेलस्काफ्ट फर इंटरनेशनल जुसामेनरबेइट : जीआईजेड : जीएमबीएच
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