अफगानिस्तान की महिलाओं को आगामी बान सम्मेलन में जरूर सुना जाना चाहिए, जलाल फाउंडेशन की प्रमुख ने कहा

स्रोत: SADF Asianet 47067
श्रेणी: General
 
 
 
02/11/2011 12:36:10:353PM
 
अफगानिस्तान की महिलाओं को आगामी बान सम्मेलन में जरूर सुना जाना चाहिए, जलाल फाउंडेशन की प्रमुख ने कहा
ब्रुसेल्स, 1 नवंबर, पीआरन्यूजवायर- एशियानेट ।
अफगानिस्तान के भविष्य को लेकर आयोजित आगामी बान सम्मेलन से महिलाओं और लड़कियों की आवाज को बाहर रखने से तालिबान का साहस बढ़ेगा और देश के भविष्य के बारे में अब तक नहीं सुनी गई समस्या भी पनपेगी । ऐसा मानना है जलाल फाउंडेशन की संस्थापक और प्रमुख डा. मेसौदा जलाल का, जिन्होंने आज प्रमुख यूरोपीय शहरों के दो दिवसीय समर्थन दौरे को पूरा कर लिया ।
डा. जलाल ने कहा कि ब्रुसेल्स की गैर सरकारी संस्था साउथ एशिया डेमोक्रेटिक फोरम के सहयोग से आयोजित उनका दौरा आगामी बान सम्मेलन में यूरोप के नीति-निर्माताओं को यह याद दिलाने का एक अहम अवसर था कि अफगानिस्तान की सरकार में तालिबान की घुसपैठ से कितना बड़ा खतरा हो सकता है ।
डा. जलाल ने कहा कि वह अपनी चिंताओं के बारे में विशेष रूप से नाटो, यूएनएचसीआर और आईएलओ जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों की प्रतिक्रिया जानकर काफी खुश हुईं ।
उन्होंने अफगानिस्तान की महिलाओं और लड़कियों की मदद के लिए मिल-जुलकर काम करने के खास तरीके विकसित करने के लिए नाटो के एक प्रस्ताव का स्वागत किया । डा. जलाल ने कहा कि वह शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र उच्चायोग के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की गई इन टिप्पणियों से भी खुश हैं कि सिविल सोसायटी को बान वार्ता में शामिल किया जाना चाहिए न कि उन्हें अलग रखा जाना चाहिए ।
और उन्होंने संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय श्रम आयोग की शीर्ष प्रबंधन टीम के एक सदस्य की टिप्पणी की भी सराहना की, जिन्होंने कहा कि अफगानिस्तान के भविष्य को लेकर चल रही नीति-निर्माण की चर्चा से महिलाओं को अलग रखना इस देश के लिए एक त्रासदी साबित होगा ।
बर्लिन, ब्रुसेल्स, पेरिस और जिनेवा में वरिष्ठ राजनयिकों, अधिकारियों और गैर-सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ अपनी बातचीत के दौरान डा. जलाल ने अपना नजरिया बार-बार दोहराया कि अफगानिस्तान की महिलाओं को बान सम्मेलन में पूर्ण प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए ।
उन्होंने तालिबान के साथ समझौता करने को लेकर कई अफगानियों के बीच अपनी गहरी मुखालफत जाहिर की और उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय यह सोचकर एक बड़ी गलती कर रहा है कि तालिबान को यदि अफगानिस्तान की शासन प्रणाली में भागीदारी करने दिया जाए तो वे लोकतांत्रिक सिद्धांतों और मानवाधिकार मानकों को स्वीकार कर लेंगे ।
डा. जलाल की यह यात्रा अफगानिस्तान की महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों के लिए अफगानिस्तान की अग्रणी चैंपियन के तौर पर उनकी स्थिति को मजबूत बनाती है । यह भूमिका वह जलाल फाउंडेशन के जरिये निभा रही हैं जो इस क्षेत्र में काम करने वाली इस देश की प्रमुख समर्थक संस्थाओं में से एक है । डा. जलाल ने कहा : ‘‘बान सम्मेलन के सिर्फ चंद हफ्ते रह गई हैं । इसे देखते हुए यह महत्वपूर्ण हो गया है कि अफगानिस्तान की महिलाओं के संदेश पूरी दुनिया में फैलाए जाएं । ‘‘बान वार्ता से हमें बाहर रखना अफगानिस्तान में मानवाधिकारों तथा शांति स्थापना के लिए खतरनाक साबित होगा । ‘‘अंतरराष्ट्रीय समुदाय यदि सोचता है कि तालिबान के पुनर्वास से अफगानिस्तान के राजनीतिक भविष्य का मसला हल हो जाएगा तो वह बहुत बड़ी भूल कर रहा है । ‘‘अफगानिस्तान में ज्यादातर लोग तालिबान के आतंक के साये में जिंदगी गुजार चुके हैं और वे तालिबान की वापसी नहीं होने देना चाहते हैं । ‘‘तालिबान स्पष्ट रूप से सभी प्रगतिशील, लोकतांत्रिक और मानवीय मूल्यों को खारिज करता है । ‘‘अफगानिस्तान की शासन प्रणाली में तालिबान की भागीदारी के लिए माहौल बनाना एक अदूरदर्शी और खतरनाक नीति है जिसका परिणाम आने वाले कई दशकों तक बुरा होगा । ‘‘मुझे खुशी है कि यूरोप के कई राजनीतिक प्रभाव वाले लोग अफगानिस्तान में महिलाओं तथा लड़कियों के सशक्तीकरण के महत्व को समझते हैं । ‘‘अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने पिछले दशक के दौरान अफगानिस्तान में बहुत ज्यादा निवेश किया है और मेरे देश में महिलाओं और लड़कियों की स्थितियों में आया सुधार इस निवेश को प्रतिबिंबित करता है । ‘‘तालिबान को सत्ता पर एक बार फिर काबिज होने की अनुमति देने से सभी तरक्की तत्काल मिट जाएगी । ‘‘बान सम्मेलन में किसी भी यथार्थ का तब तक दावा नहीं किया जा सकता जब तक कि इसमें अफगानिस्तान की महिलाओं के दृष्टिकोण का पर्याप्त समावेश न हो । ‘‘उनका नजरिया भी स्पष्ट है । हम नहीं चाहते कि तालिबान हमारे देश का भविष्य तय करने में भागीदारी करे । ‘‘मैं अपनी यूरोप यात्रा के दौरान एसएडीएफ को संस्थागत एवं वित्तीय समर्थन से खुश हूं और मुझे खुशी है कि हमने साझी चिंता वाले मुद्दों पर अपने संपर्कों को मजबूत किया है । स्रोत : साउथ एशिया डेमोक्रेटिक फोरम
संपर्क : पाउलो कसाका
साउथ एशिया डेमोक्रेटिक फोरम

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